झांसी। प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार और विकास कार्य के लिए संस्कृति विभाग ने पुरातत्व विभाग से मंदिरों की सूची और उनका मौजूदा हाल मांगा था। विभाग ने झांसी से 30 मंदिरों की सूची भेजी है। इनमें महानगर से पंचकुइयां मंदिर, रघुनाथ जी मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, सुंदरगिरी महाकालेश्वर मंदिर, सूर्य शक्ति पीठ मंदिर, पानी वाली धर्मशाला का हजारिया महादेव मंदिर आदि प्रमुख हैं।
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा भगवान श्री राम की तपो नगरी चित्रकूट को तेजी से संवारा जा रहा है। बुंदेलखंड के लगभग सभी इलाकोें में प्राचीन मंदिरों की भरमार है, जो शैव, शाक्त एवं वैष्णव संप्रदाय के हैं, जिनका निर्माण गोसाईयों, मराठों सहित विभिन्न समाजों व मत संप्रदायों के द्वारा करवाया गया था। इन मंदिरों में बुंदेली भित्ति चित्र और मूर्तिकला के अद्भुत दर्शन होते हैं। लेकिन रख रखाव के अभाव में कई मंदिरों में चित्र लगभग मिट चुके हैं। वहीं, इनमें से कई मंदिर अतिक्रमण की चपेट में हैं और मंदिरों की भूमि का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।
ऐसे में प्राचीन मंदिर व उनकी धरोहर सुरक्षित रहे और इनका समुचित विकास कार्य हो सके इसके लिए शासन ने सन 1857 से पहले बने मंदिरों के बारे में जानकारी पुरातत्व विभाग से तलब की थी। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट अक्तूबर में और अंतिम रिपोर्ट दिसंबर में भेजी गई। सूची में महानगर क ा अठ खंभा मंदिर, लक्ष्मी मंदिर, गणेश मंदिर, फूटा चौपड़ा का मंदिर, मैमासन देवी का मंदिर, नवग्रह का मंदिर आदि हैं। वहीं बरुआसागर का शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, बबीना में राम जानकी मंदिर, चिरगांव में प्राचीन शिव मंदिर, बड़ागांव का राधा कृष्ण मंदिर सहित अन्य हैं। प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के अनुसार सूची में भेजे गए मंदिरों में विकास कार्य होंगे। यह मंदिर जन सामान्य एवं विभाग के सर्वे में मिले हैं। मंदिरों के मौजूदा हाल पर भी शासन को रिपोर्ट दी गई है।