झांसी। डकैती की वारदात में शामिल होकर खाकी वर्दी को दागदार करने वाले तीनों सिपाहियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू हो गई है। इसके लिए तीनों के ही पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। तीनों सिपाहियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि विवेचना सिर्फ डकैती तक सीमित नहीं है बल्कि गिरफ्तार तीनों सिपाहियों के आपराधिक लोगों से रिश्ते, उनकी गतिविधियों समेत आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल कराई जा रही है।
डकैती कांड में गिरफ्तार राघवेंद्र राजपूत, मनोज कुमार और नीरज राजपूत पीएसी की 33वीं बाटलियन में 2019 बैच में भर्ती हुए थे। झांसी में तीनों ही पुलिस लाइन में एक साथ तैनात रहे। यहां से उनकी दोस्ती हुई। यहां से वर्ष 2023 में उनका तबादला उरई पुलिस लाइन हो गया। तीनों ही एक साथ ड्यूटी करते थे। सूत्रों ने बताया कि इन तीनो में राघवेंद्र ही मास्टर माइंड था। वह सट्टा खेलने का शौकीन था। झांसी में सट्टेबाजी के दौरान ही उसकी जान पहचान अंकित यादव से हुई थी। अंकित ने बाद में उसकी मुलाकात सटोरिये सूर्यांश यादव से कराई। राघवेंद्र झांसी आने पर अक्सर ही सूर्यांश से मिलता था। सूर्यांश ने उसे अपने ट्रैवल्स काम में हिस्सेदारी भी देने का वादा किया था। राघवेंद्र ने नीरज को भी ट्रैवल्स के काम में पार्टनर बना लेने का बहाना बनाकर डकैती में शामिल कर लिया था। राघवेंद्र ने सबको समझाया था कि सट्टे का पैसा होने की वजह से किशन पुलिस से शिकायत करने नहीं जाएगा। कुछ दिनों में मामला ठंडा हो जाएगा। किसी को पता नहीं चलेगा। अब इस मामले के भंडाफोड़ के बाद जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपी पहले भी इस तरह से किसी वारदात को अंजाम दे चुके। जांच के दौरान हवाला और सट्टेबाजी से संभावित संबंधों की भी पड़ताल हो रही है। राघवेंद्र समेत तीनों सिपाहियों के अपराधियों से संपर्क भी तलाशे जा रहे हैं। आरोपी सिपाहियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और वित्तीय लेन-देन का भी विश्लेषण हो रहा है। सीओ सिटी रामवीर सिंह ने बताया कि विभागीय जांच कराई जा रही है। उसके आधार पर आगे कार्रवाई होगी।