नवजात बच्ची का मेडिकल कॉलेज में चल रहा उपचार।
- फोटो : REPORTERS
झांसी। मां मैं तो तेरी परी थी। तू कहती तो मैं रोती भी नहीं। भूख को भी बर्दाश्त कर लेती। बस तेरे ममता भरे आंचल में लिपटी रहती। लेकिन तूने मुझे खुद से दूर करके आखिर कौन सी सजा दी। मां जब कुत्ते मुझे नोच रहे थे तब मैं दर्द से तड़प रही थी। उस वक्त मैं तुझे पुकार रही थी लेकिन तू मेरे पास नहीं थी। मेरा एक हाथ कुत्तों ने खा लिया है। एक कान खराब हो गया। कमर पर कई जगह नोचा है। मां मुझे ठंड भी लग गई है। डाक्टर कह रहे हैं निमोनिया हो गया है। सांस भी सही से नहीं ले पा रही हूं। ऑक्सीजन दी जा रही है...कूड़े के ढेर में फेंकी गई यह नवजात अगर बोल पाती तो शायद अपनी जननी से यही पूछती।
भीषण ठंड में जब जिंदगी कंपकंपा रही है उस मौसम में यह नवजात घंटों खुले आसमान के नीचे कूड़े के ढेर में पड़ी रही। एक पतले से कपड़े में वह लिपटी हुई थी। क्योंकि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के बाहर जहां नवजात को फेंका गया था वहां आसपास कई नर्सिंग होम भी हैं। हो सकता है कि इनमें से किसी में उसका जन्म हुआ हो। या फिर यह भी हो सकता है कि नवजात को कहीं दूसरी जगह से लाकर यहां फेंक दिया गया हो। कुछ भी हो सकता है लेकिन मेडिकल कालेज में भर्ती इस नवजात के बारे में जिसने भी सुना वही बेचैन हो गया। मंगलवार की सुबह तक आसपास में जब लोगों को जानकारी हुई तो कई महिलाएं तो उसे देखने भी पहुंच गईं थीं। हालांकि डाक्टरों ने गंभीर हालत बताते हुए किसी को जाने नहीं दिया। मेडिकल कालेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया का कहना है कि उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी लिहाजा ऑक्सीजन पर रखा गया है। ठंड में पड़ी रही है लिहाजा निमोनिया भी हो सकता है।