झांसी। बुंदेलखंड में ही भूमि संरक्षण के कार्यो में जमकर लापरवाही बरती जा रही है। इस वर्ष बजट न होने के बाद भी इनकी आवश्यकता देखते हुए मनरेगा से इसे कराने का निर्णय हुआ। प्रत्येक इकाई को दो करोड़ रुपये के कार्य मनरेगा से कराने को कहा गया लेकिन अफसर बजट के मुताबिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तक तैयार नहीं कर सके। अब बारिश शुरू हो जाने से पूरे प्रोजेक्ट के खटाई में पड़ने की आशंका है।
पानी की कमी को देखते हुए झांसी में भूमि संरक्षण के लिए कई कार्य कराए जाते हैं। इनमें बंधी, चैकडैम, कच्चे तालाब बनाने जैसे कार्य प्रमुख है। इस दफे कोविड-19 के प्रभाव से ईकाई को नया बजट जारी नहीं हुआ। इसे देखते हुए ईकाई के तमाम कार्य मनरेगा से कराने का निर्णय हुआ। झांसी मंडल, भूमि संरक्षण की दस इकाइयों को दो-दो करोड़ से मनरेगा के जरिए कार्य कराने थे। इसके जरिए प्रवासी मजदूरों को रोजगार भी देना था लेकिन, अफसरों ने पूरे प्रोजेक्ट में कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखाई।
नतीजतन, तीन माह बाद तक बजट के मुताबिक प्रस्ताव ही नहीं बने। इतने समय बाद भी माताटीला मंडल के मैदानी योजना सिर्फ 16 हजार रुपये, डीपीएपी जालौन 11.58 लाख रुपये, जालौन प्रथम 9.41 लाख रुपये, ललितपुर 90 हजार रुपये एवं महरौनी इकाई सिर्फ 1.88 लाख रुपये का ही कार्य करा सका। जलागम ईकाई का हाल भी काफी बुरा है। इसकी पांच इकाइयों में राजकीय जलागम ने 51 हजार, चिरगांव ने 44 हजार, मऊरानीपुर ने 16 हजार, उरई ने 7.76 लाख एवं जालौन द्वितीय ने 1.62 लाख रुपये से ही मजदूरों से कार्य कराया। अब मानसून शुरू होते ही यह कार्य भी ठप पड़ जाएंगे।
प्रमुख सचिव तक लगा चुके आला अफसरों को फटकार
भूमि संरक्षण विभाग के कार्यों में लापरवाही से नाराज प्रमुख सचिव कृषि डॉ .देवेश चतुर्वेदी उपनिदेशक, मताटीला को फटकार तक लगा चुके हैं। उन्होंने बेहद धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए सुधार न होने पर कार्रवाई का अल्टीमेटम भी दिया लेकिन, कार्यों में रफ्तार अभी तक नहीं आई है। कृषि निदेशक एवं मंडलायुक्त ने भी विभागीय लापरवाही पर नाखुशी जाहिर की थी।