झांसी। दुष्कर्म और एससी /एसटी एक्ट में 20 साल तक जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद हाईकोर्ट से निर्दोष साबित होकर बाहर आए विष्णु तिवारी के सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। न तो उसके पास कोई काम है और न ही जेब में दाम। रहने के लिए छत तक का इंतजाम भी नहीं है। बुनियादी जरूरतों के लिए विष्णु अफसरों के दहलीज पर दस्तक देते हुए मंगलवार को मंडलायुक्त कार्यालय में पहुंचा। प्रार्थना पत्र के जरिये विष्णु ने जमीन का पट्टा व आवास दिलाए जाने की मांग की।
ललितपुर के थाना महरौनी के ग्राम सिलावन के रहने वाले विष्णु तिवारी को बीस साल पहले दुष्कर्म और एससी /एसटी एक्ट के एक झूठे मामले में फंसा दिया गया था। तब वो जेल में ही बंद था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उच्च न्यायालय से वो निर्दोष साबित हुआ, जिसे हाल ही में जेल से रिहा किया गया। लेकिन, बीस साल बाद जब घर आया तो सबकुछ बिखरा हुआ पाया। लंबी कानूनी लड़ाई में पारिवारिक जमीन बिक गई। आर्थिक तंगी के चलते घर - गृहस्थी भी गड़बड़ा गई। यहां तक कि माता-पिता और दो भाइयों का साथ भी छूट गया। जेल से रिहा हुआ विष्णु लाचारी की हालत में है। न रहने को घर है और न ही रोजी-रोटी का इंतजाम। हालांकि, तमाम सामाजिक लोग उसकी मदद को आगे आए हैं, लेकिन उनकी सहायता पूरा जीवन व्यतीत करने के लिए नाकाफी साबित हो रही है। रोजगार और आवास के लिए विष्णु अब अधिकारियों की चौखट पर लगातार दस्तक दे रहा है। इसी क्रम में उसने मंगलवार को झांसी आकर मंडलायुक्त को संबोधित प्रार्थना पत्र दिया, जिसके जरिये खेती के लिए जमीन का पट्टा व आवास उपलब्ध कराने की मांग की।
कमिश्नरी में विष्णु के साथ कांग्रेस के प्रदेश सचिव राहुल रिछारिया समेत आशीष कुमार दुबे, लक्ष्मीनारायण पटैरिया, केपी राजा, सत्यम राजा, रामअवतार रिछारिया, सतीश चौबे, भूपेश चतुर्वेदी, राहुल चतुर्वेदी, जितेंद्र रिछारिया व केके रिछारिया आदि मौजूद रहे।