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अफसरों की सड़क ‘मक्खन’ सी गड्ढे ढूंढते रह जाओगे, जनता की सड़क ऊबड़खाबड़ गड्ढे ही गड्ढे

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सीता होटल के पास ऑफिसर्स कॉलोनी चमचमाती सड़क। अमर उजाला
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झांसी। शहरों की क्षतिग्रस्त सड़कों पर हिचकोले खाना आम आदमी की मजबूरी बन गया है। शहर में जगह-जगह सड़कों पर गड्ढों की वजह से आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं। उन्हें रीढ़ की हड्डी में दर्द, स्लिप डिस्क जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। वाहनों का भी कचूमर निकल रहा है। कार के सस्पेंशन, एलाइनमेंट से लेकर दोपहिया वाहनों के शॉकर जल्दी-जल्दी खराब हो रहे हैं। उधर, हुक्मरानों के घरों को जाने वाली सड़क ‘मक्खन’ की तरह हैं जिन पर गड्ढे ढूंढते रह जाओगे।
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इन सड़कों की स्थिति बहुत खराब
पीडब्ल्यूडी एवं नगर निगम का गढ्ढा भरो अभियान पूरी तरह फ्लाप साबित हो चुका है। दोनों महकमे मिलकर भी शहर के महत्वपूर्ण मार्गों के गढ्ढे नहीं भर सके। बीकेडी चौराहा से मंडलायुक्त कार्यालय से होते हुए चित्रा चौराहा, सीपरी बाजार में रेलवे का डाट पुल, ओरछा गेट से तालपुरा, तालपुरा से बालाजी मंदिर, सब्बीमंडी जैसे इलाकों में सड़कों पर बड़े-बड़े गढ्ढे हैं। इन सड़कों से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं लेकिन, गढ्ढों भरी राह होने की वजह से यहां दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है।
हर तीन माह में कराई जाती है पैचिंग
सामान्य सड़कों की पैचिंग कराने में तमाम नियम-कायदों का पाठ पढ़ाने वाला पीडब्ल्यूडी महकमा अधिकारियों के आवासों के आसपास प्रत्येक तीन माह के भीतर वृहद पैमाने पर पैचिंग का काम कराता है। पीडब्ल्यूडी सूत्रों के मुताबिक इसके लिए खास अनुरक्षण बजट होता है जिससे, ऐसे सभी कार्य कराए जाते हैं। हर तीन माह में मरम्मत होने की वजह से इन सड़कों में कभी बड़ा स्पॉट नहीं पैदा होता।

ध्यानचंद स्टेडियम के ठीक सामने ऑफीसर्स कॉलोनी को जाने वाली बदहाल सड़क पर फेली गंदगी। अमर उजाला

चित्रा चौराहा से सीपरी बाजार जाने बाली सड़क भी कई जगह से उखड़ी पड़ी है सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं।

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