दो माह की लंबी कवायद के बाद आखिरकार जिले में जमीन के नये सर्किल रेट पर मुहर लग गई है, जिन्हें शुक्रवार से लागू कर दिया गया है। सर्किल रेट में बारह फीसदी तक की बढ़ोत्तरी की गई है। जबकि, नगर के बीच तथा आसपास की जमीनों की प्रकृति में भी व्यापक बदलाव किया गया है।
निबंधन विभाग द्वारा जुलाई माह की शुरुआत से ही जमीन के नये सर्किल रेट का मसौदा तैयार किया जाने लगा था। इसके लिए सब रजिस्ट्रारों के माध्यम से तहसील स्तर पर सर्वे कराया गया था। अगस्त माह की शुरुआत में इसे लागू करने की तैयारी थी। लेकिन, विभाग द्वारा तैयार किए गए मसौदे पर आईं आपत्तियों के चलते इन्हें लागू नहीं किया जा सका। जिलाधिकारी के निर्देश पर पुन: सर्वे किया गया तथा नया मसौदा तैयार किया गया। इस पर आपत्तियां ली गईं, जिनका निस्तारण कर शुक्रवार से नये सर्किल रेट लागू कर दिए गए।
इसके तहत नगर क्षेत्र व आसपास की जमीनों में व्यापक फेरबदल किया गया है। फुटेरा, भोजला, गोरामछिया, टांकोरी, रक्सा, पाली पहाड़ी, सिजवाहा व खैलार को अर्द्ध नगरीय क्षेत्रों में शामिल कर दिया गया है। इससे यहां सर्किल रेट में आठ से दस फीसदी तक की बढ़ोत्तरी की गई है। इसके अलावा मौजा झांसी खास, डड़ियापुरा, पिछोर व तालपुरा की प्रकृति कृषि क्षेत्र से बदलकर आवासीय कर दी गई है। यह फैसला पिछले कुछ वर्षों के दौरान उक्त क्षेत्रों में हुए बैनामों के अध्ययन के बाद किया गया है। यहां 99 प्रतिशत बैनामे आवासीय हो रहे हैं। इसके अलावा महानगर की सीमा में सर्किल रेट में दस फीसदी तक की बढ़ोत्तरी की गई है। जबकि, आसपास के तेजी से विकसित हो रहे कृषि क्षेत्र की जमीनों का सर्किल रेट 12 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है।
इसके अलावा तहसील टहरौली, गरौठा व मऊरानीपुर के ग्रामीण क्षेत्रों के सर्किल रेट में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। जबकि, उक्त तहसीलों के शहरी क्षेत्रों में दो फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। मोंठ तहसील में दो प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है। पेड़, कुआं व नलकूप की भूमि की दर नहीं बढ़ाई गई है।
सहायक महानिरीक्षक निबंधन ए के पासवान ने बताया कि सर्किल रेट में बदलाव कर जमीन की सरकारी कीमत बाजारू कीमत के समतुल्य लाई गई है। नये रेट शुक्रवार से लागू कर दिए गए हैं।