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ओशियन बैंड की स्टाइल सबसे अलग

Tue, 29 Dec 2015 01:16 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। 25 साल हो गए हैं बैंड को चलते-चलते, पर हमारे म्यूजिक को कोई एक नाम दे पाना मुश्किल है। श्रोताओं का मानना है कि  हमारे म्यूजिक का स्टाइल सबसे जुदा है, इसे किसी एक दो नामों में सीमित नहीं रखा जा सकता है। यह बातें झांसी जन महोत्सव में प्रस्तुति देने आए मसान, पीपली लाइव व सत्याग्रह जैसी प्रसिद्ध फिल्मों में संगीत देने वाले इंडियन ओशियन बैंड के सदस्यों ने अमर उजाला से बातचीत में कहीं।
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हिंदुस्तानियों को अपने संगीत से दुनिया भर की सैर कराने वाले इंडियन ओशियन बैंड के सदस्य अमित किलम ने बताया कि हम खुद के लिखे व बनाए गीतों को लोगों के सामने पेश करते हैं। अक्सर लोग कहते हैं कि आपका म्यूजिक हमें कभी फ्यूजन, कभी रॉक तो कभी फोक जैसा लगता है।

अमित ने अपने पिछले साल रिलीज हुए एलबम ‘तनदनु’ का जिक्र करते हुए बताया कि इस एलबम के सातों गाने संगीत जगत की अलग-अलग हस्तियों के साथ रिकॉर्ड किए गए हैं, जिसमें शंकर महादेवन, शुभा मुद्गल और विश्वमोहन भट्ट जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
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वहीं, बैंड के चर्चित चेहरे राहुल राम ने ‘तनदनु’ के दो चर्चित गाने ‘नदियां हैं हम बहने दो, सैलाब हैं बहने दो, रोके से हम कब रुके’ व ‘घूम रहा चरखा रे जोगिया घूम रहा चरखा’ को गुनगुना कर सुनाया। कहा कि यह दोनों गाने झांसी महोत्सव की प्रस्तुति में शामिल किए हैं।

वह बताते हैं कि बैंड में देशी व विदेशी वाद्ययंत्रों को शामिल किया गया है। हमारा संगीत लोगों को राजस्थान, लाहौर व अफ्रीका जैसे देशों की सैर कराता है। यही कारण है कि श्रोताओं को इसमें फोक, क्लासिकल व वेस्टर्न का मिश्रण देखने को मिलता है। वह कहते हैं कि अब वह दिन गए जब युवा किसी विदेशी बैंड के पीछे भागता था।

बेशक युवा वेस्टर्न म्यूजिक पसंद करते हैं, लेकिन उनमें देशी संगीत की चाहत भी खूब है। युवाओं की सोच बदल रही है वह फोक म्यूजिक सुनना पसंद कर रहे हैं। यही वजह है कि हम अपने गीतों में फोक संगीत का तड़का भी लगाते हैं।
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अलग-अलग वाद्य यंत्रों पर सदस्यों की पकड़
राहुल राम-बेस गिटार एवं गायन
निखिल राव-गिटार
हिमांशु जोशी-गायन
अमित किलम-ड्रम
तुहीन चक्रवर्ती-तबला
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