झांसी। सरकार ने बुंदेलखंड में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की रणनीति बनाई है। गाय आधारित इस खेती पद्घति से बुंदेलखंड के सभी सात जिलों में कुल 23,500 हेक्टेयर जमीन में खेती होगी। इससे करीब पांच लाख किसानों को सीधा फायदा होगा। सरकार इन किसानों को इस पद्घति से खेती करने में मदद करेगी। सरकार की मंशा बुंदेलखंड को प्राकृतिक खेती का हब बनाने की है। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि खाद्यान्न की गुणवत्ता भी सुधरेगी।
अभी बुंदेलखंड में बेहद मामूली पैमाने पर ही किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। झांसी में सर्वाधिक करीब 50 हेक्टेयर में इस पद्घति का इस्तेमाल हो रहा है जबकि अन्य जिलों में दहाई से अधिक रकबा नहीं है। ऐसे में सरकार ने इस पद्घति को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। मंत्री परिषद की मंजूरी से झांसी, ललितपुर, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, जालौन, महोबा में प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। कृषि अधिकारियों का कहना है इन जिलों में कुल 47 विकास खंड तय होंगे। अगले पांच साल के भीतर 470 क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। कुल 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती होगी। इस पर खर्च होने वाली रकम भी सरकार खर्च करेगी। इससे बुंदेलखंड को प्राकृतिक खेती का हब बनाया जा सकेगा। यहां के उत्पाद देश एवं दुनिया के दूसरे हिस्सों में अलग टैग के साथ भेजे जा सकेंगे। पहले चरण में ग्राम स्तर पर 235 कलस्टर चयनित होंगे जबकि अगले वर्ष दोबारा 235 कलस्टर चिन्हित होंगे। प्रत्येक क्लस्टर 50 हेक्टेयर क्षेत्र का होगा। अफसरों के मुताबिक उन किसानों को प्राथमिकता मिलेगी, जिनके पास खुद पशुपालक हैं।
खत्म हो सकेगा अंधाधुंध रसायानिक खाद एवं कीटनाशकों के इस्तेमाल
एक सीजन में बुंदेलखंड में प्रयोग होता 12 लाख मीट्रिक टन रासायनिक खाद
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से खाद एवं कीटनाशकों के बेतहाशा इस्तेमाल पर भी काफी हद तक काबू पाया जा सकेगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बुंदेलखंड में हर फसली सीजन में करीब 12 लाख मीट्रिक टन खाद समेत कीटनाशकों का इस्तेमाल होता है। इस समय खरीफ सीजन के लिए बुंदेलखंड के जिलों के लिए 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया, डीएपी का कोटा तय किया गया है। इसके अलावा नीम आयल, ट्राइकोडरमा, ब्यूबेरिया बैसियाना, स्यूडोमोनास, मेंटाराइजियम, बीटी जैसे कीटनाशकों का अतिरिक्त कोटा दिया गया है।
जनपदवार खाद के इस्तेमाल का विवरण
जनपद यूरिया डीएपी
झांसी 13758 7238
ललितपुर 4839 5628
जालौन 21250 8368
हमीरपुर 57778 4763
महोबा 3300 1861
बांदा 135356 77170
चित्रकूट 10626 3728
जैविक एवं प्राकृतिक खेती में अंतर
प्राकृतिक खेती खास तौर पर गाय पर आधारित होती है। इसमें किसी प्रकार के रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं होता जो तत्व प्रकृति में पाए जाते हैं, उनके सहारे ही खेती होती है। गाय के गोबर एवं मूत्र का खेती में इस्तेमाल होता है जबकि जैविक खेती में जीवांश आधारित खाद का इस्तेमाल होता है।