सर्दी के दौरान ट्रेनों में चोरी, चेन पुलिंग और अन्य घटनाओं को रोकने के लिए आरपीएफ ने पहरा कड़ा कर दिया है। रात की हर ट्रेन में स्क्वाएड चल सके, इसके लिए सीआरपीएफ की स्पेशल टुकड़ी को झांसी मंगाया गया है। इसमें 70 जवान शामिल हैं। नियमित गाड़ियों के स्क्वाएड से भी साप्ताहिक गाड़ियों की निगरानी करवाई जा रही है।
सर्दी में ट्रेनों में बढ़ने वाले अपराध रेलवे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन जाते हैं। सुरक्षा जवानों की कमी के कारण ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे रहती है। चिह्नित 34 में से 24 ट्रेनों में ही आरपीएफ स्क्वाएड जा पा रहा था। आरपीएफ रिजर्व लाइन में सिर्फ 70 जवान ही हैं। एक स्क्वाएड में कम से कम एक हवलदार व चार जवान होने चाहिए, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा वीआईपी मूवमेंट, वेतन सुरक्षा, बस रेड चेकिंग व अन्य बंदोबस्त ड्यूटी लगानी पड़ती हैं। अतिरिक्त व्यवस्थाओं के चक्कर में आरपीएफ को यात्रियों की सुरक्षा से समझौता करना पड़ता है।
मजबूरी में रात में गुजरने वाली साप्ताहिक ट्रेनें बिना स्क्वाएड के ही गुजरती हैं। यही कारण है कि विगत 21 नवंबर को स्क्वाएड न होने के कारण बरेली इंदौर साप्ताहिक एक्सप्रेस में भोपाल के ठेकेदार किरण शर्मा की पत्नी का लाखों रुपये के जेवरात और नकदी से भरा बैग चोरी हो गया था। स्क्वाएड न होने के कारण ट्रेन बिजौली और बबीना के बीच दो घंटे तक रास्ते में खड़ी रही थी। बदमाशों की सक्रियता को देखते हुए सर्दी में आरपीएफ ने ट्रेनों में स्क्वाएड बढ़ाने के लिए सीआरपीएफ की एक टुकड़ी झांसी मंगा ली है। आरपीएफ कमांडेंट सारिका मोहन ने बताया कि अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए हर हफ्ते ट्रेनें बदल- बदलकर स्क्वाएड भेजा जा रहा है, ताकि अधिकांश ट्रेनों में जवानों की मौजूदगी रह सके।