झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान ने किसानों को मूली की नई किस्म की सौगात दी है। सफेद मूली की तुलना में स्वाद और गुणवत्ता में बहुत ही बेहतर चमकीले लाल रंग की इस मूली का नाम बुंदेलखंड की वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर ‘लक्ष्मी’ मूली रखा गया है।
‘लक्ष्मी’ मूली सलाद, अचार बनाने के लिए उत्तम है। उसकी जड़ों की लंबाई 24-25 सेंटीमीटर, मोटाई तीन से चार सेंटीमीटर तथा औसत वजन 140 से 150 ग्राम है। लक्ष्मी मूली 55-65 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी प्रति हेक्टेयर उपज 240-250 क्विंटल है। जबकि, सफेद मूली पूसा चेतकी उपज 200-225 क्विंटल/ हेक्टेयर है। लक्ष्मी मूली के विकास में कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. केआर मौर्य, पौध रोग वैज्ञानिक डॉ. जेके बबेले, फसल प्रजनक डॉ. विनीता देवी ने साझेदारी निभाई है।
लक्ष्मी मूली की व्यावसायिक खेती के लिए इसका बीज सब्जी उत्पादकों को रबी मौसम में दिया जाएगा। शनिवार को बीयू में कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने किसानों के उत्तम किस्म की मूली भेंट की। इस दौरान कुलसचिव व्यास नारायण सिंह, किसान मूंगाराम अहिरवार, मोहित कुशवाहा मौजूद रहे।