मानसूनी सीजन में अगर झमाझम बारिश नहीं हुई तो खरीफ सीजन में खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिलना भी मुश्किल होगा। बुंदेलखंड के तकरीबन सभी बांधों में अब सिर्फ प्यास बुझाने लायक ही पानी बचा है। माताटीला एवं सपरार बांध का हाल यह है कि यहां जलस्तर लगातार गिर रहा है।
मानसूनी सीजन शुरू होने के बाद जून के दूसरे पखवाड़े में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। इससे बांधों का जलस्तर लगातार घटता जा रहा है। माताटीला बांध में अब सिर्फ 993.6 फुट पानी ही शेष बचा है। पीने के पानी के लिए बांध से जल निगम सिर्फ 989 फुट ही पानी बांध से ले सकता है। इसके बाद बांध में लगे पंप नहीं चल पाते। ऐसे में अगर जलस्तर अगले महीने तक नहीं बढ़ा तो अगस्त में सिंचाई के लिए पानी भी नहीं दिया जा सकेगा।
यही हाल सुकवां-ढुकुवां, पारीछा, पहूज, सपरार, पहाड़ी, लहचूरा, डोंगरी एवं खपरार बांध का है। सिंचाई विभाग के अभियंताओं के मुताबिक उपयोग क्षमता के मुकाबले माताटीला बांध में 136 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर), सुकुवां ढुकुवां में 20.95 एमसीएम, पारीछा बांध में 12.26 एमसीएम, खपरार बांध में 2.66 एमसीएम, सपरार बांध में 8.52 एमसीएम, पहाड़ी बांध में 7.27 एमसीएम, लहचूरा बांध में 12.42 एमसीएम, बढ़वार झील में 7.78 एमसीएम पानी ही उपयोग के लिए बचा है।
2017 से अभी तक नहीं भरा गया सपरार बांध
सपरार बांध से मऊरानीपुर समेत आसपास के इलाके की करीब दो लाख आबादी को पानी पहुंचाया जाता है। बांध का पूर्ण जलस्तर 732 फुट है। बांध में 771 फुट पानी होने पर ही सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है। जब बांध का जलस्तर 718. 50 फुट पर पहुंचता है, तब सिंचाई का पानी बंद करके उसे सिर्फ पेयजल के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है। इस समय बांध का जलस्तर 711 फुट पर पहुंच चुका है। बांध में सिर्फ 8.52 एमसीएम पानी ही शेष बचा। एक्सईएन अजय भारती के मुताबिक अब पीने के लिए ही पानी बचा है। यह बांध वर्ष 2017 से अभी तक नहीं भर सका है।
अब बांध में पानी कम बचा है। इसे सिर्फ पीने के लिए सुरक्षित रखा गया है। बारिश होने पर अगर डैम भरेगा तभी सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। हालांकि सितंबर तक डैम के भरने की उम्मीद है।
-मोहम्मद फरीद, एक्सईएन, माताटीला बांध