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‘खारकीव में अब लूटपाट मची, लोग खाना और पैसा छीन रहे’

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झांसी। खारकीव में दुकानों पर खाने का स्टॉक खत्म हो जाने और बैंक, एटीएम बंद होने से अब लूटपाट मची हुई है। लोग एक-दूसरे से खाने-पीने का सामान और पैसा छीन रहे हैं। हर किसी को अपनी जान की चिंता है। जब हम लोग खारकीव में थे, तब एक साथ कई दोस्त निकलते थे। ताकि, कोई लूटपाट न कर सके। यूक्रेन के युद्ध प्रभावित क्षेत्र से झांसी लौटे विभु प्रजापति ने वहां के हालात बयां किए।
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डिफेंस कॉलोनी करगुवा जी में रहने वाले विभु ने बताया कि 2017 में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए उसने यूक्रेन की खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया था। उसने बताया कि रूस से युद्ध की आशंका के चलते 26 फरवरी को कीव से नई दिल्ली की फ्लाइट बुक कराई थी। 23 को ही सामान भी पैक कर लिया था। 24 फरवरी की सुबह जब सो रहा था, तभी धमाके की आवाज सुनाई दी और बिल्डिंग की खिड़की हिलने लगीं। गाड़ियों के शीशे टूट गए तो सायरन बजने लगे। नजदीक ही रहने वाले दोस्त को फोन किया तो उसने भी बताया कि धमाका हुआ है। वह फ्लैट में अकेला रह रहा था। फिर आठ दोस्तों ने एक साथ आने का निर्णय लिया। शाम को चार बजे ही सभी के फोन पर मेसेज भी आ गया कि सभी मेट्रो स्टेशन या फिर बंकर में चले जाएं। ऐसे में सभी आठ दोस्त पास के मेट्रो स्टेशन पहुंच गए। पूरी रात वहीं रहे। जब भूख लगती तो रिस्क लेते हुए फ्लैट आ जाते। खाने के बाद फिर मेट्रो स्टेशन चले जाते थे। ऐसा करते-करते सात दिन बीत गए। जब लगा कि ऐसा कब तक चलेगा। तब सभी ने खारकीव से निकलने का फैसला लिया। सरकार ने ट्रेन चला दी थी। इसलिए एक मार्च की सुबह खरकीव से सीधे निबीब रेलवे स्टेशन से ट्रेन में बैठ गए। निबीब स्टेशन से पोलैंड का बार्डर 75 किलोमीटर दूर था। बड़ी मुश्किल से एक बस मिली, वो प्रति व्यक्ति 50 हजार रुपये किराया मांग रहा था। एक साथ 46 लोग होने से नौ हजार प्रति व्यक्ति में बॉर्डर पर छोड़ने को राजी हो गया। दो-तीन घंटे में ही पोलैंड में एंट्री मिल गई। वहां एंबेसी के अधिकारियों ने खाने-पीने की व्यवस्था की। रविवार की सुबह स्टेशन आने पर पिता रामलाल प्रजापति लेने पहुंचे। घर पर मां सुनीता ने उसे मनपसंद खाना बनाकर खिलाया।
कई देशों के छात्र थे, पर बस में लगा था भारत का झंडा
विभु ने बताया कि निबीब स्टेशन से बस से जब वो लोग पोलैंड आ रहे थे, तब कई छात्र-छात्राएं दूसरे देशों के भी बैठे थे। मगर बस में सिर्फ भारत पर झंडा लगा हुआ था। इस वजह से कोई परेशानी नहीं हुई। किसी ने रोका-टोका नहीं और बॉर्डर तक आसानी से पहुंच गए।
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रेलवे स्टेशन जाते वक्त एक किलोमीटर आगे गिरा था बम
खारकीव रेलवे स्टेशन की तरफ जब विभु अपने दोस्तों के साथ पैदल ही बढ़ रहा था, तब एक किलोमीटर आगे बम गिरा था। विभु ने बताया कि इस घटना से सभी दोस्त सहम उठे। उसके बाद हर कदम खौफ में बढ़ा। जब स्टेशन पहुंच गए तक जान में जान आई।
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