झांसी। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से केजीएमयू (किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) में मरीजों की मौत पर हाईकोर्ट के कड़े रुख से अब जूडा पर लगाम कस गई है। कोर्ट ने कॉलेज प्रशासन को कई ऐसे दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे अब जूडा को हड़ताल करना आसान न होगा।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों के अभद्र व्यवहार और फिर हड़ताल करने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। इससे यहां इलाज को आने वाले मरीजों में दहशत का माहौल रहता है। इनकी गुंडागर्दी पर पुलिस-प्रशासन नकेल कसने की सोचता भी है, तो यह हड़ताल की धमकी देकर मामला रफादफा करवा देते हैं।
कुछ ही ऐसे मामले हुए जिसमें जूडा को मुंह की खानी पड़ी, मगर अब हाईकोर्ट की सख्ती असरदार साबित हो सकती है। शुक्रवार को केजीएमयू मामले के बाद कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने का कानूनी अधिकार नहीं है। हड़ताल पर जाने वाले डॉक्टरों की पहचान कर उनका रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
एक वेबसाइट बनाकर उनका नाम, अप्रेजल रिकॉर्ड, हड़ताल पर जाने का कारण सार्वजनिक किया जाए, साथ ही एमसीआई को इन डॉक्टरों के प्रैक्टिस करने का लाइसेंस निरस्त करने के लिए लिखा जाए। कोर्ट की इस सख्ती के बाद अब डॉक्टरों को हड़ताल करना आसान न होगा। वहीं, इस संबंध में जब प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कोर्ट के आदेश की अभी कॉपी नहीं देखी है, जो भी न्यायालय ने आदेश दिया है, उसका अनुपालन करवाया जाएगा।
19 मई को गार्ड को किया था लहूलुहान
वार्ड के अंदर हुई चोरी से गुस्साए जूनियर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज परिसर में 19 मई की रात जमकर तांडव मचाया था। दो सिक्योरिटी गार्डों को पीटकर उनकी आंखों में डंडा घुसेड़ दिया, जिससे वे घायल हो गए। अन्य कर्मियों के साथ भी मारपीट की। गार्डों ने तलाशी के नाम पर रुपये भी छीनने के आरोप लगाए थे।