नगर पालिका परिषद में अब ई-टेंडर की जगह पुराने ढर्रे में ही टेंडर कराने के दिन लद गए हैं। ईओ ने शासन से इतर काम करने से साफ इंकार कर दिया है। उन्होंने करीब 30 लाख रुपये के कामों का ई टेंडर कराने के निर्देश विभागीय कर्मियों को दिए हैं। इससे अध्यक्ष के करीबी ठेकेदारों की मंशा पर पानी फिर गया है।
नगर पालिका परिषद ने शहर के सभी वार्डों का विकास कराने का जिम्मा अपने हाथों में ले रखा है। कई वार्डों में सड़क, नाली के निर्माण की जरूरत है। इसे ध्यान में रखकर करीब 30 लाख रुपये के कामों को ई टेंडर से हटकर पुरानी प्रक्रिया के तहत निविदा कराने की जोड़तोड़ चल रही थी। इसके लिए कई कामों को नौ लाख रुपये की सीमा के आसपास रखा था, जिससे कि इन कामों को ई टेंडर के दायरे से बाहर रखा जा सके।
जब यह फाइल एसडीएम सदर/ ईओ नगर पालिका परिषद घनश्याम वर्मा के समक्ष प्रस्तुत हुई तो उनका माथा ठनक गया। उन्होंने शासनादेश के इतर पुरानी प्रक्रिया में हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इससे उन ठेकेदारों का बड़ा झटका लगा है जिन्हें इन टेंडरों का काम मिलने की पूरी संभावना थी। नगर पालिका परिषद में यह कोई नया कारनामा नहीं है, इससे पहले भी ई टेंडर की जगह पुराने ढर्रे पर टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई थी। लेकिन जब से एसडीएम सदर ने ईओ का चार्ज संभाला है तब से इस तरह के कामों पर अंकुश लग गया है। उधर, कई सभासदों में भी प्रक्रिया लंबी खिंचने पर मायूसी देखी जा रही है।
तीस लाख रुपये के कामों में ई टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसका प्रकाशन लोकप्रिय समाचार पत्रों में प्रकाशन कराने व वेबसाइट पर अपलोड कराने के निर्देश दिए हैं। शासनादेश का पूरी तरह पालन कराया जाएगा।
- घनश्याम वर्मा, एसडीएम सदर/ईओ नगर पालिका