इस स्थिति को देखकर लग रहा है कि प्रशासन अब नई भर्ती नहीं करेगा।
प्रेमनगर के महावीरन क्षेत्र में सौ करोड़ से अधिक लागत से तैयार हुए कोच मरम्मत कारखाने में रेलवे बोर्ड ने हर साल ढाई सौ कोचों की मरम्मत का लक्ष्य बनाया था। कारखाने में बनी शॉप के हिसाब से 993 अधिकारी व कर्मचारियों के पद सृजित किए गए थे। मगर वर्तमान में 139 अधिकारी व कर्मचारियों की ही तैनाती है। इनमें सौ कर्मचारी ही कोच मरम्मत के काम में लगे हैं, बाकी विभागीय कार्यों में तैनात हैं। रेलवे ने पुराने नौ जोनों से मय पोस्ट के 24-24 (कुल 216) कर्मचारी देने के निर्देश दिए थे। मगर, यह कर्मचारी भी कारखाने को नहीं मिल सके।
इस कारण प्रशासन ने अधिकांश कारखाने की शॉपों को प्राइवेट हाथों में दे दिया है। इनमें स्ट्रीपिंग शॉप, बॉडी शॉप, पेंटिंग शॉप, एयर ब्रेक शॉप, कारपेंट्री शॉप, बोगी शॉप शामिल हैं। वर्तमान में हर माह चार कोच तैयार करके निकाले जा रहे हैं। इस स्थिति को देखकर लग रहा है कि प्रशासन अब नई भर्ती जल्द करने नहीं जा रहा है।
‘रेलवे भर्ती बोर्ड में नई नियुक्ति के लिए प्रक्रिया चल रही है। जब तक कर्मचारियों की कमी पूरी नहीं होती हैं, तब तक प्राइवेट काम कराया जाएगा। यही कारण है कि वित्तीय सत्र 2016- 17 में 40 कोच निकालने का लक्ष्य दिया गया है। प्राइवेट कर्मियों की गंभीरता से निगरानी की जा रही है, ताकि संरक्षा से खिलवाड़ न हो।’
अतुल्य सिन्हा, मुख्य कारखाना प्रबंधक