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अब निजी हाथों में होगा बिजली विभाग का ‘खजाना’

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light pol - फोटो : demo
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 बिजली विभाग के बिल जमा काउंटरों पर पैसे के लेन देन का काम अब एक निजी कंपनी के प्राइवेट कर्मचारी संभालेंगे। प्रदेश सरकार की ई सुविधा योजना के तहत यह काम मेधज टीईसी सेल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सौंप दिया गया है। कंपनी ने कर्मचारियों की नियुक्ति कर ली है। साथ ही विभाग ने कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराने के लिए कंपनी को पत्र दे दिया है। उम्मीद है कि इसी महीने से प्राइवेट कर्मचारी अपना काम शुरू कर देंगे।  
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अभी बिजली विभाग के बिल जमा (कैश) काउंटरों पर एक सरकारी कैशियर (स्थायी) और एक प्राइवेट ऑपरेटर की तैनाती है। जहां कैशियर की व्यवस्था नहीं है, उन काउंटरों पर विभाग ने अपने टीजी टू या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बिठा रखा है। हर काउंटर पर सरकारी कर्मचारी के नाम से कंप्यूटर आईडी बनी है, उसी आईडी पर बिल जमा होते हैं। मगर विभाग ने अब प्रदेश सरकार की ई सुविधा योजना के जरिये बिल जमा करने का काम प्राइवेट कंपनी को सौंप दिया है। यह कंपनी राजस्व एकत्रित कर विभाग को सौंपेगी। विभाग के कैशियर राजस्व को बैंक में जमा करवाएंगे। साथ ही कंपनी विभाग का कैश काउंटर से लेकर कंप्यूटर, प्रिंटर और स्टेशनरी का प्रयोग करेगी। पता चला है कि शासन और कंपनी के बीच इस कार्य के लिए पांच से सात साल के लिए करार हुआ है।
वैसे कंपनी को एक मई से अपना काम शुरू करना था, लेकिन विभागीय कार्यवाही के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका। हालांकि, कंपनी ने कैश काउंटर पर अपने कर्मचारी बिठाने के लिए नियुक्तियां कर ली हैं। उनकी पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पुलिस सत्यापन और कंप्यूटर आईडी बनने के बाद वह अपना काम शुरू कर देंगे।
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‘कंपनी द्वारा नियुक्त कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराने के लिए विभाग की तरफ से पत्र जारी कर दिया गया है। यह काम पूरा होने और आईडी बनने के बाद वह अपना काम शुरू कर देंगे।’
गौरव कुमार, प्रभारी अधीक्षण अभियंता (महानगर)।


शहर में खुले हैं 20 काउंटर
शहर में एक लाख चार हजार बिजली उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं के बिल जमा करने के लिए अलग- अलग स्थानों पर 20 काउंटर खुले हैं। इनमें सुकुवां ढुकुवां कॉलोनी में दो, मुन्नालाल पावर हाउस में दो, रानी महल सबस्टेशन पर दो, सदर बाजार में एक, पंचवटी सबस्टेशन पर एक, मेडिकल कॉलेज पर एक, खालसा सबस्टेशन पर एक, सीपरी बाजार पुल के पास एक, नंदनपुरा स्थित आरोग्य सदन आवास विकास पर एक, हंसारी सबस्टेशन पर एक, गल्लामंडी सबस्टेशन पर एक, प्रेमनगर सबस्टेशन पर एक, हींगन कटरा में एक काउंटर खुला है।


बदले में मिलेंगे 25.22 रुपये
टेंडर की शर्त के मुताबिक विभाग कंपनी को प्रत्येक बिल जमा करने पर 25 रुपये 22 पैसे देगा। जैसे झांसी महानगर में एक लाख चार हजार उपभोक्ता हैं तो इस हिसाब से कंपनी को हर महीने 25 लाख 32 हजार 88 रुपये का भुगतान मिलेगा। मालूम हो कि विभाग को महानगर से हर महीने 30 से 32 करोड़ रुपये बिजली बिल से राजस्व मिलता है।


यह होगा नफा नुकसान
जैसे की महानगर में 20 बिल काउंटर हैं और प्रत्येक पर एक स्थायी सरकारी कर्मचारी तैनात हैं। अगर एक कर्मचारी का वेतन अगर 40 हजार रुपये प्रतिमाह है तो इस हिसाब से सबका वेतन आठ लाख रुपये बैठेगा। अभी प्राइवेट ऑपरेटर को कंपनी पांच हजार रुपये प्रतिमाह दे रही है। इस हिसाब से 20 कर्मचारियों के एक लाख रुपये हो गए। इस हिसाब से विभाग का कुल खर्च अभी नौ लाख रुपये आ रहा है। निजी हाथों में उक्त काम के जाने के बाद विभाग को 16 लाख रुपये अतिरिक्त देने होंगे।


निजीकरण की तरफ बढ़ रहे कदम
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निगम लिमिटेड के निजीकरण की तरफ कदम बढ़ते जा रहे हैं। अभी तक विभाग ने बिजली घर और मेंटेनेंस कार्य को ही निजी कंपनियों को सौंप रखा था। बिल जमा काउंटरों के निजी हाथों में जाने के बाद एक कदम और बढ़ गया है। आगे ग्रामीण क्षेत्र के बिल जमा काउंटरों को भी निजी हाथों में सौंपने की योजना है। बिजली प्रबंध तंत्र का मानना है कि अगर स्थायी अधिकारी व कर्मचारी अब कभी हड़ताल करते हैं तो मेंटेनेंस और बिल जमा करने काम नहीं रुकेगा। वहीं, बिजली अधिकारी व कर्मचारी संगठन इस निजीकरण के विरोध में आचार संहिता खत्म होते ही आंदोलन का मन बना चुके हैं।

पांच माह से नहीं मिला वेतन
बिजली विभाग के काउंटरों पर अभी जो प्राइवेट ऑपरेटर काम कर रहे हैं उनको संबंधित कंपनी ने पिछले पांच महीने से वेतन नहीं दिया। इससे वह परेशान हैं। वह कई बार अपने अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। उनको बस आश्वासन मिल जाता है।
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