अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर सतत निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक पखवाड़ा पूर्व पेशेंट ट्रैकर सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए। इसके बाद भी 113 पंजीकृत सेंटरों में से 30 ने ही सिस्टम लगाने की रिपोर्ट सौंपी है। ऐसे में शेष सेंटरों को एक सप्ताह का मौका दिया है। इसके बाद नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।
जिले में करीब 200 अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं, इनमें से 113 सेंटर स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं। भ्रूण लिंग परीक्षण पर प्रभावी रोक लगाने और हर जांच का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के उद्देश्य से डिप्टी सीएमओ ने पीसीपीएनडीटी एक्ट का हवाला देते हुए पेशेंट ट्रैकर सिस्टम लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने इस व्यवस्था को अनिवार्य किए जाने के संबंध में पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा। जिस पर डिप्टी सीएमओ ने ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों का हवाला देते हुए जवाब भेज दिया।
डिप्टी सीएमओ डॉ. आशीष अग्निहोत्री ने बताया सभी संचालकों को एक सप्ताह का समय दिया है। यदि तय अवधि में रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती है तो संबंधित सेंटरों को नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह होता है पेशेंट ट्रैकर सिस्टम
पेशेंट ट्रैकर सिस्टम का उद्देश्य अल्ट्रासाउंड जांच का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और भ्रूण लिंग परीक्षण जैसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखना है। इसके तहत अल्ट्रासाउंड मशीन में ऑनलाइन ट्रैकिंग डिवाइस लगाई जाती है, इससे मशीन के चालू और बंद होने का समय स्वयं दर्ज होता है। साथ ही प्रत्येक मरीज का विवरण, जांच कराने का कारण व रेफर करने वाले डॉक्टर का नाम भी रिकॉर्ड होता है। इससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के पालन की निगरानी आसान हो जाती है।