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न सैट-बैक, न ही 12 मीटर रोड, कैसे पास होगा नक्शा?

Mon, 31 Jul 2017 12:52 AM IST
amarujala
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hospital jhansi news - फोटो : demo
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झांसी। 
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मानकों को जमींदोज कर तने नर्सिंग होमो पर अब आफत आ गई है। डीएम/जेडीए उपाध्यक्ष कर्ण सिंह चौहान ने आवासीय नक्शे पर बने नर्सिंगहोमाें को व्यावसायिक नक्शा पास कराने के निर्देश दिए हैं लेकिन कई अस्पताल जेडीए के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। आवासीय नक्शा होने से गलियों और संकरी रोड के किनारे बने नर्सिंग होमो के सामने न ही 12 मीटर रोड है और न ही सैट-बैक। ऐसे में इनका नक्शा पास होना मुश्किल है। नर्सिंगहोमों को नए सिरे से निर्माण करवाना होगा। 
सन् 2005 के पहले तक बने नर्सिंग होमो को मार्ग, सैट-बैक (चारों तरफ किनारे का रास्ता), सीढ़ियों की छूट है। मगर 2005 के बाद खुलने वाले अस्पतालों को तीनों मानकों को पूरा करना जरूरी है। जेडीए के मानक अनुसार आवासीय क्षेत्र में बने नर्सिंग होमो के भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 300 वर्गमीटर और मार्ग की चौड़ाई न्यूनतम 12 मीटर होनी चाहिए। साथ ही न्यूनतम फ्रंटेज भी 12 मीटर होना जरूरी है। सैट-बैक का भी नियम है। 12.5 मीटर की ऊंचाई वाले 300 से 500 वर्ग मीटर तक क्षेत्रफल के भवनों के सैट बैक के मानक अनुसार आगे 4.5, पीछे 4.5 और अगल-बगल 3 व 1.8 मीटर की जगह छोड़नी आवश्यक है। वहीं, 501 से 1000 और 1000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवन के सामने 9, पीछे 4.5, अगल-बगल 3-3 मीटर की जगह छूटी होनी चाहिए। 12.5 से 15 मीटर की ऊंचाई वाले 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवन के आगे 9, पीछे व अगल-बगल पांच-पांच मीटर की जगह छोड़नी होगी। 
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चूंकि, महानगर के अधिकतर नर्सिंग होम आवासीय नक्शे पर तने हैं, इसलिए कइयों की दीवारों एक दूसरे से जुड़ी हैं। शहर के कई क्षेत्रों समेत मेडिकल कॉलेज के आसपास गलियों के अंदर बने अस्पतालों के सामने 12 मीटर रोड नहीं है। साथ ही सैट-बैक भी नहीं है। ऐसे में यदि आग लगने की घटना होती है, तो एक से दूसरे और फिर अन्य सटे हुए नर्सिंग होमो इसकी चपेट में आ सकते हैं। सैट-बैक न होने से अग्निशमन विभाग की आग बुझाने वाली गाड़ियां भी अस्पतालों के अंदर नहीं जा सकती हैं। आवासीय नक्शे की आड़ में व्यवसाय चलाने वाले अस्पताल अब खुद ही अपने बुने जाल में फंस गए हैं। बीते बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी/ जेडीए उपाध्यक्ष ने झांसी विकास प्राधिकरण में नर्सिंगहोम व मकानों के नक्शों की सुनवाई की थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिन नर्सिंगहोम का नक्शा जेडीए से स्वीकृत नहीं हैं अथवा स्वीकृत नक्शा के विपरीत निर्माण है, तो संशोधित नक्शा स्वीकृत कराएं। अन्यथा ध्वस्त किया जाएगा। उन्होंने इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया था। समय सीमा पूरी होने में तो तीन दिन बचे हैं। मगर व्यावसायिक भवनों के नियम नर्सिंग होमो के लिए मुसीबत बन गए हैं। ऐसे में कई अस्पतालों का व्यावसायिक नक्शा पास होना असंभव है। 
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बॉक्स..
बेड का मानक भी तय
क्षेत्रफल (वर्ग मीटर)   बेड 
300-400               10
401-500               15
500 से ज्यादा            20

वर्जन..
सैट-बैक होना जरूरी 
जेडीए के मानक अनुसार नर्सिंग होमो में सैट-बैक होना जरूरी है। साथ ही कम से कम 12 मीटर की सड़क होनी चाहिए। नर्सिंग होमो की जांच चल रही है, जहां कमियां मिल रही हैं। उसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट संबंधित विभाग के अधिकारियों को दी जाएगी।
 - महावीर सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी। 
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