झांसी। महानगर की सुरक्षा को बनाई गई नगर दीवार (परकोटा) अब खुद सुरक्षा को मोहताज है। आलम यह है कि लोगों ने दीवार को तोड़कर यहां अवैध निर्माण कर लिए हैं। इसके साथ ही भांडेरी गेट स्थित परकोटे को तोड़कर नगर निगम खुद बनाना भूल गया है। ऐसे में ऐतिहासिक धरोहर दम तोड़ रही है। इनके संरक्षण को लेकर जिम्मेदार भी पहल नहीं कर रहे हैं।
भांडेरी गेट परकोटे पर अवैध निर्माण
महानगर के भांडेरी गेट परकोटे को नगर निगम ने बीते साल एक नाले के लिए तोड़ दिया था। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा, तो परकोटे का निर्माण कराने की बात कही गई। मगर आज तक निर्माण नहीं किया गया। अब हालात यह हैं कि परकोटे को तोड़कर लोगों ने अवैध निर्माण कर लिए हैं। वहीं परकोटे के पास से गुजर रहे रास्ते को बंद कर दिया गया है। लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
हादसे का सबब बन रहा लक्ष्मीगेट परकोटा
महानगर का लक्ष्मीगेट परकोटा हादसे का सबब बन रहा है। पिछले साल परकोटे का कुछ हिस्सा टूटकर गिर गया था। जिसे दुरुस्त कराने के लिए कोई पहल नहीं की गई। यहां से रोज सैकड़ों लोग गुजरते हैं, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
सात किलोमीटर में फैला है परकोटा
ओरछा नरेश वीर सिंह जूदेव ने सन् 1613 ईस्वी में किले का निर्माण कराया था। आक्रमणों, चोरों और बदमाशों से नगरवासियों की सुरक्षा के लिए मराठा सूबेदार शिवराव भाऊ ने सन 1796 से 1814 के बीच 7.3 किमी लंबे परकोटे का निर्माण कराया। परकोटे में दस दरवाजे खंडेराव द्वार, दतिया द्वार, उनाव द्वार, ओरछा द्वार, लक्ष्मी द्वार, सागर द्वार, सैंयर द्वार, भांडेर द्वार, बड़ागांव द्वार और झरना द्वार बनाए गए। इसके अलावा चार खिड़कियां बनवाई गईं थीं।
पुरातत्व विभाग और नगर निगम चेता
उनाव गेट परकोटे पर कब्जे के मामले में पुरातत्व विभाग ने डीएम को पत्र लिखा है। पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने कहा है कि परकोटे के 20 फुट दूरी तक कोई भी निर्माण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इसे स्मार्ट सिटी में शामिल किया जाए। वहीं बृहस्पतिवार को नगर निगम के प्रवर्तन दल के प्रभारी कर्नल एनएन वाजपेयी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया। साथ ही निर्माण कार्य की जानकारी जुटाई। उन्होंने कहा कि परकोटे पर अवैध कब्जा नहीं होने देंगे।