झांसी। जो दूध आपके घराें तक पहुंच रहा है और जिसके भरोसे आप अपने बच्चों को तंदरुस्त बनाने की सोच रहे हैं वो बेदम है। इसी तरह जिले में देशी घी मिलावटी बिक रहा है। खाद्य विभाग के नमूनों की जांच रिपोर्ट में देशी घी में मिलावट और दूध अधोमानक पाया गया है। इसके अलावा भी अन्य पदार्थ मानक पर खरे नहीं उतरे हैं। कोरोना काल में मजबूत प्रतिरोधक क्षमता बहुत जरूरी है। दूध और घी बच्चों से बड़ों तक हर व्यक्ति के दैनिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इनमें हेरफेकर कर मिलावटखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
खाद्य विभाग की तरफ से खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेजे गए थे। अब इसकी रिपोर्ट आ गई है। जांच रिपोर्ट में देशी घी और गुटका के सैंपल फेल हो गए हैं। देशी घी में वनस्पति की मिलावट पाई गई है, जो कि सेहत के लिए ठीक नहीं है। इसके अलावा दूध की 41 जांच रिपोर्ट में 34 नमूने अधोमानक मिले हैं, यानी दूध में कहीं फैट तो कहीं पाउडर कम मिला है। शहर में सड़कों के किनारे जगह-जगह दूध की दुकानें खुल गई हैं। पैकेट वाले दूध की तुलना में इन दुकानों का दूध सस्ता पड़ने की वजह से लोग खरीदते भी खूब हैं मगर ग्राहकों को यह पता नहीं होता कि सेहत सुधारने के लिए खरीदा जाने वाला दूध स्वास्थ्य बिगाड़ सकता है। शहर में धड़ल्ले से फैट निकालकर दूध बेचा जा रहा है। इससे दूध में मौजूद सेहत सुधारने से जुड़े आवश्यक तत्व जैसे कि कैल्शियम, मिनिरल, कैलोरी की मात्रा कम हो जाती है। वहीं, पानी साफ न होने से डायरिया, हैजा बीमारी होने की भी संभावना रहती है। इसके अलावा रंगीन कचरी में रंग मानक से ज्यादा मिला है, जो भी सेहत के लिए ठीक नहीं है। वहीं, अचार में भी रंग की मिलावट पाई गई है।
गुटका में मिला मैग्नेशियम कार्बोनेट, कैंसर का रहता खतरा
खाद्य विभाग की तरफ से लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट में गुटका भी नकली मिला है। पान मसाला में चूना-कत्था की जगह मैग्नेशियम कार्बोनेट की मिलावट पाई गई है, जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारी तक होने की संभावना रहती है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंशुल गोयल ने बताया कि मैग्नेशियम कार्बोनेट मुख के म्यूकोजा को डैमेज करने का काम करता है। लगातार इसकी मिलावट वाला पान मसाला खाने से तीन साल में तीन से आठ गुना कैंसर होने की संभावना रहती है।
दूध का ये है मानक
- गाय के 100 मिलीलीटर दूध में 3.5 फीसदी फैट, 8.5 प्रतिशत पाउडर होना चाहिए।
- भैंस के 100 मिलीलीटर दूध में 6 फीसदी फैट, 9 प्रतिशत पाउडर होना चाहिए।
- मिक्स 100 मिलीलीटर दूध में 4.5 प्रतिशत फैट और 8.5 फीसदी पाउडर होना चाहिए।
बिना बताए क्रीम निकाल कर दूध बेचना अपराध
क्रीम निकालकर ग्राहक को दूध बेचना पूरी तरह से गैर कानूनी है। यह अपराध है और ग्राहक का हक मारने जैसा है। हालांकि, कुछ कंपनियां भी टोंड दूध बेचती हैं लेकिन वो इस संबंध में बाकायदा पैकिंग पर लिखती हैं। ताकि, ग्राहक को पता होता है कि वह जो दूध खरीद रहा है, उसमें कितना फैट है।
लगातार खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। हाल ही में आई रिपोर्ट में देशी घी का नमूना फेल पाया गया। दूध में किसी तरह की मिलावट नहीं पाई गई है मगर अधोमानक मिले हैं। लगातार छापामार कार्रवाई जारी रहेगी। - नरेंद्र कुमार, अभिहित अधिकारी, खाद्य विभाग।