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जिले एक भी ड्रग इंस्पेक्टर नहीं, दवाओं की निगहबानी बंद

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झांसी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में एक भी ड्रग इंस्पेक्टर (डीआई) न होने की वजह से जिले में दवाओं की निगहबानी पूरी तरह बंद हो गई है। पिछले डेढ़ महीने से एक भी दवा के सैंपल नहीं लिए गए हैं। इस कारण नकली और अधोमानक दवाओं की बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही है।
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खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर के तीन पद सृजित हैं। यहां पर सिर्फ एक ही ड्रग इंस्पेक्टर तैनात थे। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने के कारण वह तीन जनवरी से मेडिकल लीव पर चल रहे हैं। बताया गया कि उनका ऑपरेशन हुआ है। ऐसे में मौजूदा समय में एक भी ड्रग इंस्पेक्टर अपनी सेवाएं नहीं दे रहा है। डीआई न होने से दवाओं के सैंपल लेने की प्रक्रिया पूरी तरह से ठप है। इससे नकली और घटिया दवाएं धड़ल्ले से बिक रही हैं। इस मामले में सहायक आयुक्त औषधि का कहना है कि शासन को पत्र लिखकर डीआई की तैनाती की मांग की है। जल्द ही किसी की नियुक्ति हो जाएगी।
ये होता है कार्य
खाद्य पदार्थ, दवाएं, ड्रग्स, कास्मेटिक या अन्य संबंधित वस्तुओं का उत्पादन, रखरखाव, भंडारण या बिक्री करने वाले कारोबारी इकाइयों की जांच का जिम्मा ड्रग इंस्पेक्टर के पास होता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता की स्थिति में संस्थान का लाइसेंस रद्द करने का अधिकार भी ड्रग इंस्पेक्टर के पास होता है। बैक्टीरियल व अन्य केमिकल परीक्षणों के लिए सैंपल एकत्रित करना, अशुद्ध, नकली, नशीली, क्षतिग्रस्त आदि वस्तुओं को जब्त करना, उन्हें नष्ट कराने की जिम्मेदारी भी ड्रग इंस्पेक्टर पर होती है। दवाओं आदि की नियमों व शर्तों आदि के बारे में लोगों को जागरूक करना भी ड्रग इंस्पेक्टर के कार्यों में शामिल है। अपनी जांचों में प्राप्त निष्कर्षों की रिपोर्ट बनाना, संबंधित अधिकारियों को प्रस्तुत करना और नियमों को स्थानीय प्रशासन के जरिए लागू कराने का भी कार्य होता है।
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