सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण का काम गार्डर न मिलने के कारण खिंचता जा रहा है। इसके लिए न ही रेलवे के अफसर और न ही जनप्रतिनिधि कोई कोशिश कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि केंद्रीय मंत्री उमा भारती अगर इसमें रुचि दिखातीं तो गार्डर बनने में इतनी देरी न होती।
रेलवे ने सीपरी ओवरब्रिज में लगने वाले गार्डर बनाने का ऑर्डर दो साल पहले ही उत्तराखंड के काशीपुर की कंपनी को दे दिया था, लेकिन भारत सरकार की स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) कंपनी वक्त लोहा उपलब्ध नहीं करा सकी। गार्डर न मिलने के कारण काम खिंचता जा रहा है। इस काम के पहले मार्च 2019 तक पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन गार्डर मिलने में हो रही देरी के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। अभी दस गार्डरों की और आवश्यकता है। रेलवे के निर्माण विभाग के अफसर की मानें तो दिसंबर में सेल गार्डर बनाने के लिए पूरा लोहा उपलब्ध करा सकता है। इसके बाद गार्डर बनने में दो महीने का वक्त और लगेगा। इस हिसाब से ब्रिज बनने में अभी छह से आठ महीने और लग जाएंगे।
वहीं, जानकारों का कहना है कि अगर यहां के जनप्रतिनिधि कोशिश करते तो अभी तक सेल गार्डर बनाने के लिए लोहा अवश्य दे देता। क्योंकि, देश के तमाम स्थानों पर इसी तरह के ब्रिज बन रहे हैं। जहां के जनप्रतिनिधि कोशिश कर लेते हैं, उनका आर्डर जल्दी पूरा हो जाता है। मालूम हो कि अभी तक सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण में रेलवे अपने हिस्से के चारों पिलर बनाने और उनके ऊपर बीम डालने का काम पूरा कर चुका है। चित्रा चौराहे की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखे जा चुके हैं। इसमें एक गार्डर का वजन 75 टन है जो उत्तराखंड में बनकर आए हैं। अब पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। इन बचे 12 गार्डर में दो आ भी चुके हैं।
रेल अधिकारियों ने नहीं किया जिक्र
केंद्रीय मंत्री व क्षेत्रीय सांसद उमा भारती ने जब भी यहां के रेल अधिकारियों से सीपरी बाजार ओवरब्रिज निर्माण के बारे में पूछा, उन्होंने काम तेजी से चलने की बात कही। मगर, यह कभी नहीं बताया कि गार्डर मिलने में दिक्कत आ रही है। वह जल्द ही इस समस्या को केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखेंगे।
-हनुमंत नरवरिया, सांसद प्रतिनिधि।
किसी को समस्या से लेना देना नहीं
यहां के जनप्रतिनिधियों को लोगों की समस्या से कोई लेना देना नहीं है। अब उनको चुनाव के वक्त अपने हितों का ध्यान रहता है। अगर वह ध्यान दें तो कोई समस्या ही नहीं रहेगी।
- बबलू राय, छनियापुरा।
तीन महीने में बन सकता है
मेरा मानना है कि अगर केंद्रीय मंत्री उमा भारती चाहें तो इस ब्रिज का काम अगले तीन महीने के अंदर पूरा हो सकता है। लेकिन उनका कोई लाभ यहां की योजनाओं को नहीं मिल पा रहा है।
-जितेंद्र प्रजापति, बसंत कालोनी, लहरगिर्द।