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लाचार मां-बाप पर बोझ न बन जाए नूरजहां

Sat, 19 Sep 2015 01:44 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
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झांसी। गरीब मां-बाप ने अच्छा घर-वर देख कर मेरा ब्याह किया था, लेकिन ससुराली जनों के अत्याचार के कारण वापस मायके में आकर रहना पड़ा। सरकार ने शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बनाया तो लगा कि अब दिन बदल जाएंगे। लेकिन, अब मुझे फिर अपने लाचार मां-बाप पर बोझ बनना पड़ेगा। यह दर्द शिक्षामित्र नूरजहां का है। वह दोनों पैरों से विकलांग है। नूरजहां ही नहीं, उसके जैसे कई शिक्षामित्र ऐसे हैं, जिनको अब  अपने भविष्य की चिंता सता रही है।
43 वर्षीय पुख्खन देवी बड़ागांव ब्लाक के तालरमन्ना से शिक्षामित्र के बाद रानीपुरा में सहायक अध्यापक बनी थीं। पति बेरोजगार हैं, जमीन जायदाद के नाम पर कुछ भी नहीं है। समायोजन के बाद कर्ज लेकर मकान बना लिया था। मकान बनते ही समायोजन पर रोक लगने की खबर मिल गई। जिन लोगों से कर्ज लिया था, अब वह लोग पैसा वापस करने के लिए टोकने लगे हैं। पुख्खन के पुत्र ने इसी वर्ष इंटर पास की है, वह उसे इंजीनियर बनाना चाहती है, लेकिन अब उसे अपना सपना साकार होता नहीं दिख रहा है।
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दयाराम प्रजापति बबीना ब्लाक के कन्या प्राथमिक पाठशाला राजापुर में शिक्षामित्र थे। समायोजन के बाद वह प्राथमिक विद्यालय देवगढ़ में सहायक अध्यापक बन गए थे। घर में वृद्ध माता-पिता, पत्नी व दो बच्चे हैं। न जमीन है और न जायदाद। पिछले कुछ माह से वेतन भी नहीं मिला। जीवनयापन कर्ज लेकर करना पड़ रहा है। समायोजन निरस्त होने के बाद तो लोगों ने उधार देना भी बंद कर दिया है।



ललितपुर के जखौरा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय कैलवारा की शिक्षामित्र शकुन रानीपुरा प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक बनी थीं। घर में तीन बच्चे व पति हैं। पति बेरोजगार हैं। समायोजन होने के बाद शकुन ने कर्ज लेकर अपना मकान बनाना शुरू कर दिया था। समायोजन रद्द होने के बाद मकान का काम अचानक रोकना पड़ गया। शकुन की सबसे बढ़ी बेटी करिश्मा दो - तीन वर्ष बाद ब्याह लायक हो जाएगी। उसको अब यह चिंता सता रही है कि यदि नौकरी बहाल नहीं हुई तो बेटी की शादी व कर्ज मुक्ति कैसे होगी।
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ललितपुर के ही 46 वर्षीय रामसिंह प्राथमिक विद्यालय बुढ़वार में शिक्षामित्र से समायोजित होकर प्राथमिक विद्यालय संधारी में सहायक अध्यापक बने थे। शिक्षामित्र रहते हुए उन्होंने कर्ज लेकर अपनी बेटी की शादी की थी। उनके तीन लड़कों में सबसे बढ़ा बेटा सूरज मजदूरी कर जीवन यापन कर रहा था। समायोजन के बाद घर की स्थिति में सुधार आया था। उम्र के इस पड़ाव में वह नया काम करने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें अपने बेटों का भविष्य उज्ज्वल नहीं दिख रहा है।
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