झांसी। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार द्वारा पॉलिथीन पर पूर्णतय: प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन शुरुआती सख्ती के बाद अब यह प्रतिबंध बेअसर साबित हो रहा है। बाजार में धड़ल्ले से पॉलिथीन का उपयोग हो रहा है। नगर निगम ने भी फिलहाल इस मामले में चुप्पी साध ली है।
प्रदेश सरकार ने पर्यावरण की सुरक्षा को देखते हुए उत्तर प्रदेश में पॉलिथीन के इस्तेमाल, उसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। 22 दिसंबर 2015 को इसका गजट भी पारित किया गया। इसको अमली जामा वर्ष 2016 में पहनाया गया। नगर निगम और पर्यावरण विभाग ने लगातार अभियान चलाया और पॉलिथीन के उपयोग व बिक्री पर प्रतिबंध लग गया। नगर निगम ने मार्च के पहले पखवाड़े में दो बड़े अभियान चलाए और कई व्यापारियों व दुकानदारों के यहां से पॉलिथीन जब्त कर उनकी दुकानों को बंद करा दिया।
सुभाष गंज, सीपरी बाजार आदि स्थानों पर पालीथिन का प्रयोग अथवा बिक्री होते मिली और सभी पर जुर्माना किया गया। अभियान के दौरान 25 किलो पॉलिथीन मिली, जबकि दूसरे चरण के अभियान में 12 किलो पॉलिथीन जब्त की गई। इन अभियानों से फुटकर दुकानदार भी घबरा गए और पॉलिथीन दिखना बंद हो गई।
अभियान चंद दिनों बाद ठंडा पड़ गया। जुर्माने का डर दिखाया पर न तो जुर्माना किया गया और न ही मुकदमा दर्ज कराया गया। नतीजा, आखिरकार वही ढाक के तीन पात वाला हुआ। एक बार फिर थोक दुकानों से बड़ी मात्रा में पालीथिन धड़ल्ले से बिकने लगी और फुटकर दुकानदारों ने इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया। शासन के आदेश को धता बताकर पॉलिथीन का उपयोग धड़ल्ले से किया जाने लगा।
‘माह में दो बार चलने वाले इस अभियान को दोबारा शुरू कराया जाएगा। यदि कहीं भी पॉलिथीन की बिक्री अथवा भंडारण पाया जाता है तो नगर निगम द्वारा संबंधित दुकानदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने पर एक हजार से 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।’
रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त