विकास के काम ही तय नहीं कर पाईं 380 ग्राम पंचायतें पूरे सूबे में 40वें नंबर पर रही झांसी 496 में सिर्फ 116 पंचायतें ही तैयार कर सकीं प्रस्ताव झांसी। ग्राम पंचायतों को इस बार विकास कार्योें के प्रस्ताव सीधे ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड करने थे लेकिन, झांसी की ग्राम पंचायतें इसमें फिसड्डी साबित हुई हैं। 496 ग्राम पंचायतों में 380 पंचायतें नाली, सड़क, पेयजल, खंडजा आदि के लिए प्रस्ताव ही नहीं बना सकीं। इस वजह से झांसी को पूरे सूबे में 40वां स्थान मिला है। अंदेशा जताया जा रहा कि स्वराज पोर्टल में प्रस्ताव अपलोड न करने वाली पंचायतों को सरकार से मिलने वाली वित्तीय मदद से भी हाथ धोना पड़ सकता है। प्रधान एवं सचिव की मिलीभगत रोकने के लिए जीपीडीपी के तहत खुली बैठक करके गांव के विकास संबंधी प्रस्ताव तैयार करने का प्रावधान हुआ। इसमें तय होने वाले प्रस्ताव आधुनिक ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड करने थे लेकिन, झांसी की ग्राम पंचायतों ने इसमें दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। खुली बैठक में प्रस्ताव तैयार करने की हिचक के चलते तमाम ग्राम पंचायतों ने अब तक न विकास प्रस्ताव तैयार किए और न उनको ई-स्वराज पर अपलोड किया। तयशुदा समय तक 496 ग्राम पंचायतों में से महज 116 पंचायतों ने ही अपने प्रस्ताव तैयार करके अपलोड किए जबकि 380 ग्राम पंचायतें ने इस दिशा में कोई काम नहीं किया। पंचायती राज विभाग ने इसके आधार पर जनपदों की रैंकिंग तय की गई, उसमें झांसी पूरे सूबे में 40 नंबर पर रही। पंचायतों की कम संख्या के चलते रैकिंग में उसके खाते महज 11.09 फीसदी अंक आए जबकि ललितपुर 48वें नंबर पर रहा। इनसेट वित्तीय मदद में हो सकती है कटौती खुली बैठक में विकास संबंधी प्रस्ताव न बनाने एवं उनको ई-ग्राम पोर्टल पर अपलोड न करने की वजह से ग्राम पंचायतों को मिलने वाली विशेष निधियों में कटौती हो सकती है। यह विशेष निधि राज्य सरकार पंचायतों की जरूरत के मुताबिक अलग से जारी करती है लेकिन, विकास प्रस्ताव बनाकर उनको ई-स्वराज पोर्टल में अपलोड करने से बरती जा रही कोताही के चलते पंचायतों को मोटी धनराशि से हाथ भी धोना पड़ सकता है। इनसेट पहली दफे ई-ग्राम स्वराज पोर्टल का इस्तेमाल पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में जमकर खेल होता रहा है। इसकोे रोकने के लिए ई-ग्राम स्वराज पोर्टल लांच किया गया। इस वर्ष पहली बार इसे लागू किया गया। इसमें जिन विकास कार्यों को अपलोड किया जाएगा उनको कराने के लिए ही वित्तीय स्वीकृत दी जाएगी लेकिन, इन सबके बावजूद पंचायत स्तर पर इनको अपनाने में आनाकानी की जा रही हालांकि डीपीआरओ जगदीश राम का कहना है कि सभी पंचायतों को पोर्टल पर ही कार्य अपलोड करने को कहा गया है। जिन्होंने अपलोड नहीं किया, उनसे भी अपलोड कराया जाएगा।