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मुख्य ट्रैक पर अब ट्रेनें दौड़ाने को नहीं जगह

Sun, 21 Oct 2018 01:52 AM IST
jhansi
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railway - फोटो : demo
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रेल मंडल में सवारी व मालगाड़ियों का लगातार संचालन बढ़ने से ओवर ट्रैफिक हो गया है। 18 साल में मंडल में 50 प्रतिशत गाड़ियों में इजाफा हुआ है। वर्तमान में झांसी-बीना 25 प्रतिशत व आगरा-झांसी सेक्शन में 13 फीसदी ओवर ट्रैफिक चल रहा है। रेल प्रशासन के लिए अब दो पटरियों पर ट्रैफिक संभालना मुश्किल होता जा रहा है।  हालांकि, तीसरी लाइन पर काम शुरू हो गया है, मगर कार्य की गति के हिसाब से अभी तीसरी लाइन के प्रयोग में तीन से चार साल और लगने की उम्मीद है।
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रेल मंडल में प्रतिदिन औसत 130 सवारी, पैसेंजर व एक सौ मालगाड़ियों का संचालन होता है। इस समय ग्वालियर से झांसी की तरफ 60, बीना से झांसी की तरफ 70, कानपुर से झांसी की तरफ 27, झांसी से कानपुर की तरफ 27, इलाहाबाद से झांसी की तरफ 12 व झांसी से इलाहाबाद की तरफ 12 गाड़ियों का संचालन होता है। तीस से अधिक साप्ताहिक व सप्ताह में दो या तीन दिन चलने वाली गाड़ियां भी शामिल हैं। सबसे अधिक ट्रैफिक आगरा- भोपाल मेन लाइन पर है। इस लाइन पर हर पांच से दस मिनट में सवारी या मालगाड़ी दौड़ती रहती है। इस लाइन पर आगरा- झांसी के मध्य 12 प्रतिशत व झांसी- बीना के मध्य 22 प्रतिशत ओवर ट्रैफिक चल रहा है।
समय के साथ गाड़ियों में लगातार इजाफा होता जा रहा है। ऐसे में ट्रैक पर होने वाली छोटी-छोटी घटनाएं भी पूरे रेल संचालन को पटरी से उतार देती हैं। बढ़ते ट्रैफिक के हिसाब से तीसरी रेल लाइन की आवश्यकता बढ़ गई है। दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर तीसरी लाइन का काम शुरू हो गया है। जब तक तीसरी रेल लाइन पर संचालन शुरू नहीं होता है, तब तक नई गाड़ियों का चलना मुश्किल ही लग रहा है।
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रेल प्रबंधन प्रणाली से रखी जा रही नजर
चौबीस घंटे जिन पटरियों पर ट्रेनें दौड़ती हैं, रेलवे ने उनकी मरम्मत, रखरखाव आदि की जिम्मेदारी रेल पथ निरीक्षकों को सौंप रखी है। रेलवे ने एक निश्चित ट्रैफिक गुजरने  के बाद उस पटरी को बदलने का प्रावधान किया है। रेल पथ निरीक्षक रेल प्रबंधन प्रणाली से पटरियों पर नजर रख रहे हैं। इस प्रणाली में एक- एक इंच पटरी की ऑनलाइन जानकारी ली जा सकती है।

इस योजना पर नहीं हो सका काम
रेल पटरियों पर बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए दो मालगाड़ियों को एक साथ जोड़कर चलाने की योजना बनाई गई थी। शुरूआत में प्रयोग भी किए गए, मगर संचालन में आ रहे व्यवधान के कारण यह योजना गति नहीं पकड़ सकी। दो मालगाड़ियों को एक साथ खड़ी करने के लिए पंद्रह सौ मीटर लाइन की आवश्यकता पड़ रही थी। इसे ध्यान में रखकर रेल प्रशासन ने मंडल के छह स्टेशनों पर पंद्रह सौ मीटर की लूप लाइन बनाई थी।  सिकरौंदा व आंतरी (झांसी व आगरा के मध्य), बुढ़पुरा व माताटीला (झांसी व बीना के मध्य) के अलावा बांदा- कानपुर सेक्शन तथा मानिकपुर -नैनी सेक्शन में एक- एक स्टेशन पर यह लाइन बनाई है। मगर इन लाइनों का प्रयोग दो मालगाड़ियों को एक साथ खड़े करने में नहीं हो पा रहा है। मालगाड़ी जोड़कर नहीं चलाई जा रही हैं।
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तीसरी लाइन का तेजी से चल रहा काम
तीसरी रेल लाइन का काम तेजी से चल रहा है। इस लाइन के पूरे होने पर मालगाड़ी चलाने के लिए अलग ट्रैक हो जाएगा, जिससे रेल संचालन सुगम हो जाएगा।
- मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी
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