महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के एक भी पद नहीं भरे होने से गंभीर ह्रदय रोगियों का झांसी में इलाज नहीं हो पाता है। वॉल्व बदलने, एंजियोग्राफी कराने के लिए मरीजों को दिल्ली, लखनऊ, कानपुर रेफर कर दिया जाता है। कई बार हालत गंभीर होने पर मरीज की मौत हो जाती है।
झांसी मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट का एक पद है। वर्ष 2014 से यह पद खाली चल रहा है। एमडी फिजीशियन का कार्डियोलॉजिस्ट का जिम्मा सौंपा गया है। मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीजों को फिजीशियन ही देखते हैं। कई बार पद भरने के लिए विज्ञापन निकाला गया लेकिन कोई आवेदन नहीं आया। फिजीशियन सामान्य ह्रदय रोगियों की जांच के बाद दवा लिख देते हैं मगर जिन मरीजों के वॉल्व बदलने, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी होनी होती है, उन्हें दिल्ली के एम्स, लखनऊ के पीजीआई, कानपुर के ह्रदय रोग संस्थान और ग्वालियर रेफर करना पड़ता है। बताया गया कि हर महीने 20 से 25 गंभीर ह्रदय रोगियों को मेडिकल कॉलेज से बाहर रेफर किया जाता है।
जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के दो पद हैं। इन पदों का सृजन सन् 1996-1997 में हुआ था मगर आज तक तक यहां किसी कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई। यहां पर भी ह्रदय रोगियों के इलाज का जिम्मा फिजीशियन को जिम्मा सौंपा गया है। जिला अस्पताल से भी प्रतिमाह छह से आठ गंभीर मरीज दूसरे शहरों को रेफर किए जाते हैं। चूंकि, जिला अस्पताल में सामान्य फिजीशियन के तीन पदों में एक और चेस्ट फिजीशियन के दो पदों में एक पहले से खाली चल रहा है। ऐसे में सामान्य फिजीशियन को कार्डियोलॉजिस्ट की जगह तैनात करने से फिजीशियन ओपीडी भी प्रभावित हो रही है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. हरीशचंद्र आर्या और जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीके गुप्ता का कहना है कि फिजीशियन से सामान्य ह्रदय रोगियों का इलाज हो जाता है।