झांसी। विद्युत सहायक अभियंता की आईडी का दुरुपयोग कर बिल की बकाया धनराशि में किए गए कई लाख रुपयों के गोलमाल प्रकरण में एक साल का समय बीत गया है। इस मामले में एसटीएफ को झांसी आकर जांच करनी थी। मगर न तो एसटीएफ आई और न ही स्थानीय अधिकारियों ने कोई रुचि ली। इससे किसी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
अप्रैल 2015 में विद्युत विभाग के नंदनपुरा उपखंड अधिकारी सचिन द्विवेदी की आईडी का दुरुपयोग कर बकाया धनराशि कम करने के सत्ताइस मामले सामने आए थे। इन उपभोक्ताओं की धनराशि 25 मार्च, 10 अप्रैल व 15 अप्रैल को कम की गई थी। कुल 6.75 लाख रुपये का घालमेल किया गया था।
इसमें खिरकपट्टी निवासी रूबी वर्मा ऐसी उपभोक्ता थीं, जिनकी बकाया राशि को दो बार कम किया गया था। इन पर 88000 रुपये का बकाया था। दो बार राशि कम कर इनका बिल मात्र 1838 रुपये रह गया था। इस मामले के खुलासे के बाद उपभोक्ता खुद ही स्वीकार कर चुकी है कि उन्होंने इसके बदले एक व्यक्ति को पचास हजार रुपये दिए थे। ऐसा ही सच अन्य मामलों में भी सामने आया था। हालांकि, मामले का खुलासा होने के बाद कारगुजारी में शामिल रानी महल सब स्टेशन पर कार्यरत एक ऑपरेटर व प्रेमनगर क्षेत्र के एक मीटर रीडर को हटा दिया गया था। चूंकि, प्रदेश स्तर पर इस तरह के और भी मामले सामने आए थे। इस कारण जांच एसटीएफ को सौंप दी गई थी। इस प्रकरण की जड़ें और भी गहरी थीं और इसमें विभाग के भी कई लोगों के शामिल होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
मगर एक साल बीतने के बाद न तो एसटीएफ इस मामले की जांच के लिए झांसी आई और न ही स्थानीय स्तर पर अफसरों ने मामले में कोई रुचि दिखाई। स्थानीय अफसर भी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।