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अगले साल से शुरू होगा झांसी-बबीना ‘थर्ड ट्रैक’, तेजी से हो रहा निर्माण कार्य

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railwar ncr jhansi - फोटो : demo
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बबीना के बीच तीसरी लाइन पर तेजी से काम चल रहा है। इस सेक्शन में पड़ रहे चार बड़े और 18 छोटे पुलों का निर्माण शुरू हो गया है। एक बड़ा पुल और 12 छोटे पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है। अगस्त 2019 में इस ट्रैक के काम को पूरा करने का लक्ष्य है। रेलवे की सबसे पहले इसी ट्रैक पर ट्रेन दौड़ाने की तैयारी है।
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झांसी से ललितपुर के बीच तीसरी लाइन को बिछाने का काम रेलवे का निर्माण संगठन कर रहा है। भले ही निर्माण संगठन ने बबीना और बसई के बीच 13 में से 12 किलोमीटर लाइन बिछाकर पहले चरण का काम लगभग पूरा कर लिया हो, मगर ट्रेनें दौड़ाने का काम झांसी से बबीना (25.35 किलोमीटर) के बीच पटरी डालने के बाद ही शुरू होगा। इन दिनों झांसी और बबीना के बीच पड़ने वाले चार बड़े और 18 पुलों का निर्माण चल रहा है।

इसमें 12 छोटे पुल और झांसी से बिजौली के बीच एक बड़े पुल का निर्माण भी पूरा हो चुका है। जगह- जगह मिट्टी डालकर समतलीकरण किया जाने लगा है। बिजौली और खजराहा पर स्टेशन की नई बिल्डिंग बननी है। अगर, सब कुछ ठीक रहा तो अगले साल झांसी से बबीना के बीच तीसरी लाइन पर ट्रेनें दौड़ना शुरू हो जाएंगी।  मालूम हो कि झांसी से बीना के बीच तीसरी लाइन का काम 2490 करोड़ में पूरा होना है।
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‘जनवरी से झांसी से बबीना के बीच ट्रैक बिछाने का काम शुरू हो जाएगा। पुलों का निर्माण पहले से ही तेजी से चल रहा है। अगस्त 2019 तक तीसरी लाइन पर ट्रेनें दौड़ाने का लक्ष्य है।’
संजय सिंह नेगी, अपर मंडल रेल प्रबंधक।
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चौथी रेल लाइन के हिसाब से हो रहा काम

मथुरा- झांसी- भोपाल के बीच चौथी रेल लाइन भी स्वीकृत हो चुकी है। इसलिए तीसरी लाइन के काम के साथ चौथी के लिए भी अभी से जमीन तैयार करना शुरू कर दी गई। स्टेशन बिल्डिंग और प्लेटफार्म भी चार ट्रैक को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं, ताकि दोबारा तोड़फोड़ या उनको विस्तारित न करना पड़े।

अभी ये समस्याएं
- मथुरा-झांसी-बीना लाइन पर मथुरा से झांसी के मध्य 12 प्रतिशत और झांसी बीना के मध्य 22 प्रतिशत ओवर ट्रैफिक (ओवरलोड) है।
-आए दिन ट्रेनें लेट हो जाती हैं, क्योंकि लोड अधिक होने के कारण प्रमुख ट्रेनों को पहले रास्ता देना जरूरी होता है।
- लोड के कारण कई बार ट्रेनों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। प्रतिकूल मौसम में दिक्कत और बढ़ जाती है।
- इन रूटों पर लोड को देखते हुए नई ट्रेनों की जरूरत है। लेकिन दो पटरियां अब और बोझ सह सकने में अक्षम हैं।
- पटरियों की मरम्मत करने के लिए अक्सर ट्रेनों का संचालन लेकर बंद करना पड़ता है। इसके लिए कभी-कभी लंबे समय के लिए ब्लाक लेना पड़ता है।

अब मिलेगी राहत
- इस रूट पर नई ट्रेनों को चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
- मालगाड़ियों के लिए एक बिल्कुल अलग लाइन हो जाएगी।
- नई ट्रेनों के चलने पर यात्रियों के लिए आरक्षण कोटा बढ़ जाएगा
- मालगाड़ियों का समय पालन सुधरने पर माल समय पर पहुंचेगा।
- दुर्घटना पर तीसरी रेल लाइन विकल्प के रूप में काम कर सकेगी।
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