फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नई तकनीक के कोचों की शुरू हुई पीरिऑडिक ओवरहॉलिंग

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। कोच मरम्मत कारखाने में नई तकनीक के एलएचबी कोचों की पीरिऑडिक ओवर हॉलिंग (कोचों की समय-समय पर मरम्मत) का काम शुरू हो गया है। इन दिनों पहले एलएचबी कोच की मरम्मत का काम चल रहा है। इस कोच का काम पूरा होने पर उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक राजीव चौधरी हरी झंडी दिखाएंगे।
विज्ञापन

रेलवे ने कोच मरम्मत कारखाने का निर्माण 12 साले से ज्यादा पुराने कोचों को नया बनाने (मिड लाइफ रिहेबिलिटेशन) के लिए किया था। लेकिन रेलवे बोर्ड ने कारखाने में पिछले कुछ समय से पुराने कोचों को नया बनाने पर तीन साल तक के लिए रोक लगा दी है। अब यहां पर पुराने पारंपरिक कोच आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) की पीरिऑडिक ओवर हॉलिंग का काम शुरू हो गया है। साथ ही, पहली बार नई तकनीक के एलएचबी (लिंक हॉफमेन बुश) को भी पीओएच के लिए लाना शुरू कर दिया गया है। इन दिनों पहले एचएचबी कोच नंबर 163441 के पीओएच का काम चल रहा है।
रेलवे वर्कशॉप के निकट महावीरन स्क्रैप यार्ड में बहुराष्ट्रीय कंपनी एलएनटी द्वारा 117 करोड़ की लागत से कोच मरम्मत कारखाने (सवारी डिब्बा) का निर्माण 31 अक्तूबर 2014 में किया गया था। शुरुआत में इस कारखाने को 12 साले से ज्यादा पुराने कोचों को नया बनाने (मिड लाइफ रिहेबिलिटेशन) का काम दिया गया था। रेलवे बोर्ड ने कारखाने को 250 कोच सालाना तैयार करने का लक्ष्य दिया है। मगर अभी यह काम अगले तीन साल तक के लिए बंद कर दिया गया है।
विज्ञापन

यह होता है पीओएच
ट्रेनों में लगने वाले नए कोचों की 36 महीने और पुराने कोचों में 18 महीने में पिरीऑडिक ओवरहॉलिंग की जाती है। पीओएच में कोच के अंदर के पुराने पार्ट्स बदलने, तकनीकी खामियां दूर करने और टूट फूट के काम को दुरुस्त किया जाता है, ताकि कोच अपटूडेट बने रहें। एक कोच का पीओएच करने में कम से कम 15 दिन का वक्त लगता है। देश के अन्य वर्कशाप में जो कोच पीओएच के लिए जाते हैं, उन्हें खराब पार्ट को उसी स्तर पर सुधार कर तैयार कर दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें