झांसी। चैत्र की नवरात्र 25 मार्च से शुरू होगी। इसी के साथ ही विक्रम संवत 2077 का भी प्रारंभ होगा। इस नये साल का राजा बुध और मंत्री चंद्रमा होगा। जो देश की खुशहाली लाएगा। खेती भी ठीक और लाभदायक रहेगी।
धार्मिक मान्यता है, कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण आरंभ चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से किया था। उत्तर भारत में नया साल विक्रम संवत का आरंभ चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है। महाराष्ट्र समाज इस पावन दिवस को गुड़ी पड़वा पर्व के रूप में मनाता है। चैत्र की नवरात्र भी शुरू होती है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार चैत्र की नवरात्र 25 मार्च से शुरू होगी। पूरे नौ दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाएगी। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगा। इस दौरान ब्रह्म योग भी रहेगा। उनके अनुसार प्रतिपदा से ही विक्रम संवत 2077 का प्रारंभ होगा। इस बार नव संवत्सर का नाम प्रमादी है। बुधवार को साल का पहला दिन होने से संपूर्ण साल का राजा बुध होगा। उनके अनुसार नया साल देश के लिए खुशहाली लाएगा। कृषि भी बेहतर होगी।
देवी मंदिरों में चैत्र नवरात्र के लिए हुई तैयारियां शुरू
चैत्र नवरात्र के लिए महानगर के देवी मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई है। महानगर के सबसे प्राचीन देवी मंदिर पंचकुइंया मंदिर में विशाल मेला लगता है। इसके साथ ही मंदिर में कई धार्मिक अनुष्ठान भी होते है। इसी प्रकार से सीपरी के लहर की देवी मंदिर, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर की पहाड़ी पर स्थित कैमासन देवी व मैमासन देवी, पानी वाली धर्मशाला स्थित मां अन्नपूर्णा देवी मंदिर में सजावट आदि के कार्य होंगे।