कानपुर रोड और शिवपुरी रोड को जोड़ने वाले फोरलेन बाईपास के दोनों ओर लगातार नई - नई आवासीय परियोजनाएं विकसित होती जा रही हैं। आवास विकास परिषद भी यहां टाउनशिप विकसित करने जा रहा है। यहां विकसित होने वाली टाउनशिप में आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। दो दशक पहले 2001 में फोरलेन हाईवे का निर्माण शुरू होने के साथ ही नए झांसी की नींव रखी जाने लगी थी।
भविष्य की संभावनाओं के मद्देनजर नई बनने वाली सड़क के इर्दगिर्द रियल इस्टेट कंपनियों ने पैर पसारना शुरू कर दिए थे। 2007 में सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा खरीदी गईं जमीनों पर निर्माण शुरू हो गया था। शुरुआत में कानपुर रोड और शिवपुरी रोड को जोड़ने वाले फोरलेन बाईपास के दोनों छोरों पर एक-एक टाउनशिप तैयार हुई थी और देखते ही देखते ये दोनों टाउनशिप बस भी गईं थीं।
इससे उत्साहित होकर अन्य रियल इस्टेट कंपनियों ने भी अपनी आवासीय परियोजना को मूर्त रूप देने का काम शुरू कर दिया था। देखते ही देखते सड़क के दोनों और खेतों की जगह कॉलोनियां नजर आने लगी थीं। साल 2016 तक विकास का पहिया अनवरत रूप से घूमता रहा। लेकिन, नोटबंदी के बाद रियल एस्टेट कारोबार एकदम से धड़ाम हो गया था। अब एक बार फिर इसमें तेजी आई है। बारह टाउनशिप का निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
इन कॉलोनियों में आबादी भी तेजी से बसती जा रही है। चूंकि, कानपुर रोड और शिवपुरी रोड को जोड़ने वाला फोरलेन बाईपास पुराने शहर और सीपरी बाजार से सटा हुआ है। ऐसे में यहां आवासीय गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और जमीन की भी पर्याप्त उपलब्धता है। इसके अलावा इस बाईपास से देश के कसी भी हिस्से के लिए सड़क मार्ग से जाया जा सकता है।
टाउनशिप के भीतर की ऊंची-ऊंची इमारतें, डुप्लेक्स, विला हाउस लोगों को नए झांसी का अहसास कराते हैं। हाल ही में सखी के हनुमान मंदिर के पास आवास विकास परिषद ने 44 एकड़ में टाउनशिव की नींव रखी है। परिषद की नई कॉलोनी में पांच सौ से अधिक भूखंड बेचे जाने की योजना है। पहले चरण में 156 भूखंडों के आवंटन के लिए आवेदन लिए जाने लगे हैं।
कॉलोनियों की ये खूबियां भा रहीं लोगों को
- पुराना शहर संकरा हो चला है। कारोबारी गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। आवागमन में लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोग नई कॉलोनियों के खुले माहौल में रहना पसंद करते हैं।
- नई आवासीय परियोजनाएं चारों ओर से चारदीवारी से घिरी होती हैं। आवागमन एक गेट से होता है, जिस पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते हैं। जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं।
- नई कॉलोनियों को हराभरा बनाया जा रहा है। घरों के बाहर तो पेड़ होते ही हैं। साथ ही, हरे-भरे पार्क भी बनाए जाते हैं, जिससे चहलकदमी के लिए लोगों को बाहर नहीं जाना पड़ता है।
- कॉलोनी के भीतर ही जिम, व्यावसायिक कांपलेक्स, पार्किंग, बैंक्वेट हॉल आदि जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यानी कि घर के पास ही जरूरत के ज्यादातर इंतजाम होते हैं।
- साफ - सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता है। अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम व कूड़ा उठान की अलग से व्यवस्था होती है।
- चौबीसों घंटे पानी, बिजली की आपूर्ति की व्यवस्था होती है।
- मकान खरीदने के लिए बैंकों से भी खुले हाथों से मिल जाता है ऋण।
ललितपुर रोड पर भी तेजी से हो रहा विकास
ललितपुर रोड पर भी तेजी से टाउनशिप विकसित हो रहीं हैं। यहां पहले बनाई गईं टाउनशिप लगभग फुल हो चुकी हैं। नई विकसित होने वाली कॉलोनियों को भी मकान, प्लाटों के खरीदार खूब मिल रहे हैं। इसके अलावा महानगर के भीतरी इलाकों में भी कॉलोनियों का विकास तेजी से जारी हैं। बड़े भूखंडों पर कई मंजिला इमारत खड़ी कर मकान बेचे जा रहे हैं। शहर की घनी आबादी के बीच भी रियल इस्टेट कंपनियों ने खुले माहौल में टाउनशिप विकसित की हैं, जहां स्थित मकानों की बाजारू कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
चार सौ साल पुराना है झांसी का इतिहास
झांसी। झांसी का इतिहास चार सौ साल पुराना है। पहले इसे बलवंतनगर के नाम से जाना जाता था। ओरछा नरेश वीरसिंह जूदेव ने 1613-1619 के बीच किले का निर्माण कराया था। इसके साथ ही झांसी में आबादी का विकास शुरू हुआ था। नगर सुनियोजित विकास में पहले मराठा सूबेदार नारोशंकर ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।
विकास प्राधिकरण की सीमाओं का हुआ विस्तार
शहर के बाहर आवासीय परियोजनाएं बढ़ने के साथ ही झांसी विकास प्राधिकरण ने भी अपनी सीमाओं का विस्तार कर दिया है। लक्ष्मनपुरा, वनगुवां, नौटक्षीर, कोलवा, बरेठी, फुटेरा बरुआसागर, हरपुरा, ताल रमन्ना, घुघुवा, चिपलौटा, दानीपुरा, बड़ागांव क्षेत्र के दौन, दुनारा, सुजाटा, भूपनगर, बचावली खुर्द, बचावली बुजुर्ग, बड़ागांव, तौरबराटा, बराटा, पारीछा, रिछौरा, मथनपुरा- रमपुरा, मड़ोरा, गढ़मऊ, पठेश्वर, आरी, बेहटा, भरारी, लकारा, रूंदकरारी, रौनीजा, अंबाबाय, चंद्रा, कलोथरा, सारमऊ, सिमरा, गेवरा, रक्साक्षेत्र के पुनावली कलां, डोमागोर, ढिकौली, कोटखेरा, रक्सा, डगरवाहा, पठारी, डोंगरी, गुढ़ा, रमपुरा, मठ, बाजना, बमेर, राजापुर, गागौनी, बरुआपुरा, मुरारी, चमरुआ, किल्चवारा खुर्द, किल्चवारा बुजुर्ग, बैदोरा, खजराहा खुर्द और खजराहा बुजुर्ग को जेडीए ने अपनी सीमा में शामिल किया है।