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Jhansi News: नए भारत की सोच नई है, आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा

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वीरांगना लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि से निखरकर निकली शूरवीर बेटी कर्नल सोफिया ने केबीसी शो में दुनिया को दिया साहसिक संदेश
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-कर्नल सोफिया ने कहा, बचपन में लोरी के बजाय वीरगाथाएं सुनीं

- झांसी में कर्नल सोफिया ने लिया था प्रशिक्षण, मेजर के तौर पर भी रहीं तैनात



अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। वीरांगना लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि से प्रशिक्षण लेने के बाद ऑपरेशन सिंदूर से सुर्खियों में आईं शूरवीर बेटी कर्नल सोफिया ने केबीसी के विशेष शो में शुक्रवार को दुनिया को बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नए भारत की सोच नई है। अब नया भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और न ही सुरक्षा पर कोई समझाैता करेगा। वह स्वतंत्रता दिवस पर कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) के विशेष शो में विंग कमांडर व्योमिका सिंह एवं नौसेना की कमांडर प्रेरणा देवस्थली के साथ प्रतिभाग कर रही थीं।
केबीसी शो के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब सशस्त्र बलों की तीन महिला अधिकारियों ने कार्यक्रम के संचालनकर्ता अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर बैठकर अपने साहस, महिला सशक्तीकरण और सेना में महिलाओं की बदलती भूमिका से करोड़ों लोगों को प्रेरित किया।
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शो में कर्नल सोफिया कुरैशी ने झांसी और सेना से जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि उनकी परदादी रानी लक्ष्मीबाई की फौज का हिस्सा रहीं। उनका बचपन लोरियां सुनने के बजाय वीरगाथाएं सुनकर बीता। परिवार के कई सदस्य भी फौज में रहे। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में कर्नल सोफिया ने बताया कि महज 25 मिनट के अंदर पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकाने ध्वस्त कर दिए। यह भारतीय सेना का शौर्य था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दशकों से बार-बार उकसाता आ रहा था। इसके अलावा 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले का भी जवाब देना जरूरी था। इसी वजह से ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया गया। यह बदला नहीं था। यह संदेश था कि नया भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।

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जिंदा आऊंगी या तिरंगे में लिपटी

कर्नल सोफिया ने शो में अमिताभ बच्चन के सामने अपने जीवन का एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने अपनी जांबाजी के बारे में बताया कि सन् 2006 में वह संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत कांगो में तैनात थीं। अचानक हालात बिगड़ गए। गोलियां चलने लगीं। मिलिशिया कब्रिस्तान में छिप गए। महिलाओं सहित कई लोग फंसे थे। कर्नल सोफिया ने बताया कि उस दिन उन्हें एहसास हुआ कि शायद वह न लौटें। उन्होंने अपनी मां के लिए संदेश रिकॉर्ड किया। जिंदा आऊंगी या तिरंगे में लिपटी। मिशन सफल रहा। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना में सभी को बराबरी से आगे बढ़ने का मौका मिलता है।
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25 लाख रुपये सैन्य कल्याण कोष में देने का एलान

कर्नल सोफिया ने शो से जीती हुई 25 लाख की रकम सेना की संस्थाओं को कल्याण कोष में दान देने का एलान किया। कर्नल सोफिया कुरैशी ने दुश्मनों को मात देने का हुनर झांसी में मिले प्रशिक्षण के दौरान सीखा। यहां वह पदोन्नत होकर बतौर मेजर तैनात रहीं।कर्नल सोफिया के चाचा एवं उनके चचेरे भाई-बहन प्रेमनगर के भट्टा गांव में रहते हैं।
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