फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नए भारत के निर्माण के लिए लोहे की मांसपेशियां, इस्पात की नसों की जरूरत

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने शिक्षा के छह आयामों की जानकारी देते हुए बहुमुखी व्यक्तित्व विकास के लिए इनके समावेश को अनिवार्य बताया। स्वामी विवेकानंद के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नए भारत के निर्माण के लिए हमें लोहे की मांसपेशियों एवं इस्पात की नसों की आवश्यकता है। आज की निष्क्रिय जीवनशैली, मोबाइल, इंटरनेट, फेसबुक व्यसन आदि के अंधकार में विलुप्त युवा को व्यायाम, खेलकूद की धूप से पुन: परिचित करना होगा, ताकि बहुमुखी विकास संभव हो।
विज्ञापन

कुलाधिपति ने कहा कि शिक्षा का पहला आयाम स्वस्थ शरीर और स्वास्थ्य है। अच्छा स्वास्थ्य एक वरदान है, स्वास्थ्य से सब संभव हो जाता है। शिक्षा का दूसरा आयाम बौद्धिक क्षमताओं का विकास है। हम प्रौद्योगिकी और ज्ञान के विस्फोट युग में जी रहे हैं। मनुष्य ने प्रकृति को जीतकर अब अंतरिक्ष विजय की ओर कदम बढ़ा लिया है। मनुष्य के ज्ञानकोष में नित नए आयाम जुड़ रहे हैं। हम भारतीय ज्ञान के क्षेत्र में पुरातन काल से ही अग्रणी रहे हैं। सिंधु घाटी सभ्यता की असाधारण वास्तुकला और नगर नियोजन, नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों में संसार के विभिन्न देशों से छात्र एवं शोधार्थी गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, वास्तु आदि क्षेत्रों में ज्ञान प्राप्ति के लिए आते थे।
विश्व के बौद्धिक समुदाय का नेतृत्व करने, विश्व गुरू पुन: स्थापित होने के लिए रचनात्मकता, साहस और परंपरा को पुनर्जीवित करना होगा। तीसरा आयाम छात्रों में भावनात्मक परिपक्वता को बढ़ाना है। बढ़ती प्रतियोगिताएं, बढ़ता उपभोगवाद, आतंक और हिंसा युवाओं में गहरे अवसाद, तनाव के रूप में परिलक्षित हो रही है। इसके निवारण के लिए युवा, छात्रों में भावनात्मक परिपक्वता की जरूरत है। युवा भौतिकवाद और उपभोक्तावाद की चमक में पथभ्रष्ट हो रहे हैं। आज आवश्यकता है कि शिक्षण प्रणाली इतनी सुदृढ़ हो कि छात्रों में विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता, व्यवसाय चयन की क्षमता, अभिप्रेरणा, संवेदना, अभिरुचि का विकास करने में सहायक हो। नए भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए छात्रों में अंधविश्वासों, कुरीतियों, कुप्रथाओं, भूख, अशिक्षा, अज्ञानता, निर्धनता और जातीयता को मिटाने के लिए प्रेरणा शक्ति के साथ-साथ सहिष्णुता, विश्व बंधुता की भावना जगाना अनिवार्य है। कलात्मक अभिरुचि और सौंदर्यबोध का विकास शिक्षा का चौथा आयाम है। राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक तकनीकी युग में युवा सूर्योदय एवं सूर्यास्त की सुंदरता, देश की ऐतिहासिक महिमा और दूसरों के दुख के प्रति संवेदनहीन हो रहे हैं। आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य से अनभिज्ञ आज युवा सतही जीवन जी रहे हैं।
विज्ञापन

संगीत, कला, चित्र और जीवन के छोटे-छोटे आनंद के पलों की अनुभूति से अनजान हैं। यह शैक्षणिक संस्थानों का उत्तरदायित्व है कि वे छात्रों में सौंदर्यबोध, संवेदना, कला के प्रति अभिरुचि और सद्भावना का सृजन करें, ताकि संसार से कटुता और दुर्भावना की अनुभूति समाप्त हो। छात्रों में अनुशासन, आपसी सहयोग और सामंजस्य, स्वच्छता और कर्तव्य के प्रति समर्पण भावना को अंतर्निविष्ट करने का उत्तरदायित्व शिक्षा का पांचवां अहम आयाम है। महान राष्ट्र बनने के लिए जरूरी है कि शिक्षण के जरिए छात्रों में मूलभूत, नैतिक और सामाजिक मूल्यों का समावेश किया जाए। यदि ऐसा करने में हम सफल हो जाते हैं तो भारत में आर्य भट्ट, वराहमिहिर, रमन, भाभा, बोस, साहा और विश्वेश्वरैया जैसे महान वैज्ञानिकों, खगोलविदों, चिकित्सकों, गणितज्ञों, भौतिकविदों और तकनीकिज्ञों की कोई कमी नहीं होगी। शिक्षा का छठा और सबसे महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है युवाओं को आध्यात्मिकता की ओर उन्मुख करना। आज के भौतिक जगत की चकाचौंध में भ्रमित युवा को अंतर्मन के वास्तविक शीतल प्रकाश से आध्यात्मिकता द्वारा ही परिचित कराया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें