झांसी। एक फरवरी को आने वाले देश के बजट पर बुंदेलखंड के यात्री और मंडल रेल प्रशासन भी टकटकी लगाए हुए है। लोगों को उम्मीद है कि बजट में प्रेमनगर हाट के मैदान में बनने वाली नई कोच फैक्ट्री के लिए बजट का प्रावधान जरूर होगा, जिससे इस काम पर ब्रेक नहीं लग सकेगा।
बबीना व झांसी की तरह असम में भी कई स्थानों पर सैन्य छावनी हैं। यहां से हर वर्ष सैकड़ों की संख्या में जवान गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ आदि स्थानों के लिए सफर करते हैं। लेकिन, कोई सीधी ट्रेन न होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी तरह राजस्थान के अजमेर, अलवर, बीकानेर आदि पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों के लिए भी कोई सीधी ट्रेन अब तक नहीं मिल पाई है। इसी तरह हिमाचल में पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए कालका स्टेशन तक रेल सुविधा उपलब्ध कराई गई है, लेकिन झांसी के यात्रियों को कालका स्टेशन तक पहुंचने के लिए कई ट्रेनों को बदलना पड़ता है। इसी तरह गुजरात के कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेन नहीं है। बुंदेलखंड वासियों को पूरी उम्मीद है कि इस बार के बजट से इन स्थानों के लिए उन्हें सीधी ट्रेनें मिल सकेंगी।
प्रमुख मांगें जिनको पूरा होने का इंतजार
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- ग्वालियर रोड क्रासिंग पर ओवर ब्रिज
- झांसी में रेलवे की जमीन पर एक स्पोर्ट्स स्टेडियम
- झांसी स्टेशन पर दो अतिरिक्त प्लेटफार्म का निर्माण
- झांसी से आगरा, बीना, बांदा व कानपुर की तरफ फास्ट लोकल ट्रेन
- झांसी-लखनऊ इंटरसिटी को ललितपुर तक बढ़ाने
- झांसी में माल गोदाम का उच्चीकरण होना
- पैसेंजर ट्रेनों में बोगियों की संख्या बढ़ाकर चौदह करने
- झांसी - लखनऊ इंटरसिटी में एसी कोच की संख्या बढ़ाने
- भोपाल से सुबह के समय दिल्ली के लिए शताब्दी एक्सप्रेस
- झांसी से पूर्वोत्तर भारत के लिए सीधी ट्रेन
- झांसी - खजुराहो के बीच इंटरसिटी एक्सप्रेस का संचालन
मेरा मानना है कि आयकर छूट की मार सबसे अधिक सरकारी कर्मचारी झेल रहे हैं। वेतन तो बढ़ा दिया गया, मगर आयकर स्लैब न बढ़ने से साल में एक से दो महीने का वेतन टैक्स में ही चला जाता है।
राजेश भंडारी।
रेलवे में पिछले चार साल से नई भर्ती नहीं हो रही है। जबकि, सेवानिवृत्ति लगातार होती जा रही हैं, इससे कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों की नई भर्ती होना बहुत जरूरी है।
राहुल गोस्वामी।
प्रेमनगर हाट के मैदान में बनने वाली नई कोच फैक्ट्री से सैकड़ों हाथों को काम मिल सकेगा। निर्माण कार्य चालू हो गया है। फैक्ट्री का काम न रुके, इसके लिए बजट की व्यवस्था जरूर होना चाहिए।
मीना।
सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में स्पोर्ट्स कांपलेक्स बनाया जाना चाहिए। अगर इस ग्राउंड को क्रिकेट के रणजी मैचों के लायक बना दिया जाए तो हुनरमंद खिलाड़ियों के लिए यह वरदान साबित होगा।
मोहित कुमार।
झांसी से रोजाना डेढ़ सौ से अधिक अप और डाउन ट्रेनें देश के विभिन्न राज्यों के लिए जाती हैं, लेकिन असम समेत अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कोई सीधी ट्रेन सेवा अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
मीनू कपूर।
झांसी से बांदा, कानपुर, आगरा और ललितपुर की तरफ फास्ट व लोकल चलनी चाहिए। इन सब स्टेशनों के बीच बहुत सारे छोटे स्टेशन हैं, वहां तक जाने के लिए यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रिया पटेल।