झांसी। प्रेमनगर हाट के मैदान में बन रही नई कोच फैक्टरी का काम लगातार चल रहा है। इस काम पर ब्रेक नहीं लगेगा। भारतीय रेल विकास निगम लिमिटेड के अधिकारियों ने कंपनी को आश्वस्त किया है कि रेलवे बोर्ड से उनको कोई स्थगन आदेश नहीं मिला है। कोच फैक्टरी का काम चलता रहेगा। कोच फैक्टरी का 23 अक्तूबर को भूमि पूजन हुआ था।
भारतीय रेल विकास निगम लिमिटेड की निगरानी में प्रेमनगर के नगरा हाट के मैदान के पास 74 एकड़ में बनने वाली नई कोच फैक्टरी का काम तेजी के साथ चल रहा है। प्रेमनगर के लोगों के लिए नीम माता मंदिर के पास से कंक्रीट सड़क का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। हाट के मैदान की तरफ सड़क डालने के लिए खुदाई चल रही है। तोड़े गए रेलवे आवासों के पास पेड़ काटने का काम प्रतिदिन किया जा रहा है। फैक्टरी के निर्माण का ठेका तमिलनाडु की यूआरसी कंपनी को दिया गया है। कंपनी ने मैदान में ही अपना ऑफिस बनाया है।
कंपनी के 20 इंजीनियर काम की निगरानी कर रहे हैं। कई मशीनें आ चुकीं हैं और निर्माण सामग्री भी जगह- जगह डल गई है। पिछले दिनों यह बात सामने आई थी कि रेलवे बोर्ड फैक्टरी के कार्य को तीन साल के लिए स्थगित करने जा रहा है। इससे कंपनी अधिकारी पशोपेश में थे, लेकिन आरवीएनएल के अधिकारियों ने उनको भरोसा दिलाया है कि उनको इस तरह का कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। इससे काम को जारी रखा जाए। आरवीएनएल के एक अधिकारी ने बताया कि परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। ऐसे में स्थगन होना संभव नहीं है। मुख्यालय के अधिकारियों की भी रेलवे बोर्ड स्तरपर इस संबंध में वार्ता हो चुकी है।
यह भी जानिए
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- केंद्र सरकार ने रेल कोच नवीनीकरण कारखाना के निर्माण की 2018 में मंजूरी दी थी।
- 339 करोड़ की योजना हैं, जिसमें 37 करोड़ जीएसटी शामिल हैं।
- फैक्टरी का निर्माण 74 एकड़ जमीन पर होना है।
- तमिलनाडु की यूआरसी कंपनी को काम का ठेका सितंबर में दिया गया।
- कोरोना की वजह से जून 2020 में टेंडर खुला। पहले मार्च में खुलना था।
- फैक्टरी में 1400 पद कर्मचारियों के सृजित होंगे।
- फैक्टरी का निर्माण 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
एलएचबी कोचों का होगा निर्माण
नई कोच फैक्टरी में लिंके हॉफमेन बुश (एलएचबी) डिब्बों का निर्माण होगा। यह एक ऐसी आधुनिक प्रौद्योगिकी है, जो ट्रेन के पटरी से उतरने के दौरान डिब्बों को पलटने से रोकती है। रेल मंत्रालय ने पारंपरिक आईसीएफ डिब्बों का निर्माण 2019 से पूरी तरह बंद कर दिया। सिर्फ एलएचबी डिब्बों का उपयोग होगा। इन कोचों की गति 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। इनमें एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होता है, जिसके कारण यह डिब्बे आसानी से पटरी से नहीं उतर पाते। यह डिब्बे स्टेलनेस स्टील और एल्यूमीनियम के बने होते हैं, जबकि आईसीएफ डिब्बे माइल्ड स्टील के बने होते हैं। यह डिब्बे अलग तरह की कपलिंग से जोड़े जाते हैं। इन दिनों कोच कारखानों में एलएचबी डिब्बों को बनाने का काम तेजी से चल रहा है।