अब नेट/ स्लेट अर्हताधारी अनुमोदित समस्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से कराया जाएगा। इसके लिए संबंद्धन विभाग को दो दिन के अंदर नेट अर्हताधारी शिक्षकों की सूची बनाकर विश्वविद्यालय प्रशासन को उपलब्ध करानी होगी। राजभवन से निर्देश मिलने के बाद यह कार्रवाई की जा रही है।
गौरतलब है कि 27 जुलाई को लखनऊ स्थित राजभवन में कुलपतियों के सम्मेलन के दौरान नेट/ स्लेट के फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी प्राप्त करने की शिकायतों के मद्देनजर राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयोें को अनुमोदित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए। इसी क्रम में बुधवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंद्धन विभाग को कॉलेजों में तैनात नेट/ स्लेट पास अनुमोदित शिक्षकों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। संबंद्धन विभाग को शिक्षकों का प्रस्ताव दो दिन के अंदर तैयार कर विश्वविद्यालय प्रशासन को उपलब्ध कराना होगा, जिसको बाद में सत्यापन हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेज दिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय में कार्यरत नेट/ स्लेट अर्हताधारी शिक्षकों का भी जल्द ही सत्यापन कराया जाएगा।
यह होता है खेल
झांसी। जानकारों ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नियमन 2009 के तहत पीएचडी या फिर नेट/ स्लेट पास ही यूनिवर्सिटी अथवा एसएफएस कॉलेजों में सहायक आचार्य पद के लिए योग्य माना गया है। नवीन नियमों के मुताबिक कॉलेजों को ऐसे शिक्षक मिल नहीं रहे हैं, जिस कारण फर्जी नेट पास होने का सर्टिफिकेट लगाकर रिक्त सीटों की पूर्ति कराई जा रही है। कई मामलों में कॉलेज तो कई में शिक्षक इस खेल में शामिल हैं। अब इसकी शिकायतें राजभवन तक पहुंचने लगी हैं।