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सिंचाई विभाग के कर्मचारी अफसरों के घर कर रहे चाकरी, भले खेत सूखें किसान भुगतें

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Negligence
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झांसी। सिंचाई विभाग के जिन कर्मचारियों को नहरों की निगरानी का काम करना चाहिए वे अफसरों के आवास पर रहकर खाना बनाने के साथ उनके दूसरे घरेलू कामकाज निपटा रहे हैं। पूरे झांसी डिवीजन में तीन दर्जन से अधिक कर्मचारी अफसरों के बंगलों पर तैनात हैं। इनमें से प्रत्येक कर्मचारी को करीब 30-40 हजार रुपये की तनख्वाह सरकारी कोष से दी जाती है। इसका खामियाजा चरमराई सिंचाई व्यवस्था और किसानों को भुगतना पड़ता है।
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झांसी मंडल में सिंचाई विभाग के पास बांध समेत नहरों के संचालन एवं देखरेख का जिम्मा है। इनकी देखभाल के लिए खंडवार बेलदार तैनात किए गए हैं लेकिन, कई जगहों पर बेलदार ड्यूटी ही नहीं करते। वास्तव में यह बेलदार अफसरों के बंगलों पर उनकी सेवा-टहल को तैनात किए गए हैं। घरों में तैनात यह बेलदार वहां खाना पकाने से लेकर कपड़े धुलने, समान लाने समेत दूसरे तमाम घरेलू कामकाज निपटाते नजर आते हैं। कुछ अफसरों को छोड़ अधिकांश के यहां दो से अधिक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं। अधीक्षण अभियंता चतुर्थ मंडल के आवास पर चार कर्मचारी, मुख्य अभियंता दक्षिण के आवास पर चार कर्मचारी, समथर प्रखंड के अधिशासी अभियंता के आवास पर पांच कर्मचारी, माताटीला डिवीजन के अधिशासी अभियंता के आवास पर चार कर्मचारी, अधिशासी अभियंता बेतवा के आवास पर दो सरकारी एवं दो ठेकेदार के कर्मचारी तैनात हैं।
इसी तरह अधिशासी अभियंता पंचम के आवास पर दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से अधिकांश कर्मचारी बेलदार हैं जबकि कुछ कार्यालय में काम करने वाले चतुर्थ श्रेणीकर्मी हैं। इन नियमित सरकारी कर्मचारियों में प्रत्येक का वेतन न्यूतनम 30-40 हजार रुपये प्रतिमाह है, जिसका सरकारी कोष से हर माह व्यय होता है। इन नियमित सरकारी कर्मचारियों के अलावा प्राइवेट ठेकेदारों ने भी उपकृत होने के लिए अपने कर्मचारी अफसरों के आवास पर लगाए हैं हालांकि मुख्य अभियंता बेतवा एवं अधीक्षण अभियंता के आवास पर कोई कर्मचारी नहीं है। वहीं, प्रभारी अधिकारी एवं अधिशासी अभियंता उमेश कुमार इससे इंकार करते हैं।
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आचरण नियमावली में प्रावधान नहीं
आवास पर घरेलू कामकाज निपटाने को कर्मचारी तैनात करने की इजाजत कर्मचारी आचरण नियमावली-1953 एवं उप्र सरकारी सेवक नियमावली 1999 भी नहीं देता। प्रावधानों के मुताबिक कुछ श्रेणी को छोड़कर घर पर लैंडलाइन टेलीफोन अंटैड करने के लिए कर्मचारी तैनात किया जा सकता है लेकिन, लैंडलाइन बंद हो जाने की वजह से इनकी तैनाती भी नहीं की जा सकती।
नहीं हो पाती नहरों की निगरानी
अफसरों के आवास में बेलदार तैनात करने का सीधा असर नहरों की देखभाल पर पड़ता है। बेलदारों के मौके पर न होने से जगह-जगह मनमाने तरीके से नहरें काट दी जाती हैं। समय पर नहरों की मरम्मत नहीं हो पाती। इसके लिए ठेकेदारों से काम कराकर उनको भुगतान करना पड़ता है। फील्ड में बेलदारों की काफी कम संख्या होने की वजह से गेट बंद करने में भी ठेकेदारों की मदद लेनी पड़ती है।
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