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बसों में सुलग रहीं थी बीड़ी-सिगरेट, सीट के नीचे रखी पेट्रोल-डीजल की कैन

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बसो के अंदर खुले आम ले जाया जारहा ज्वलनशील पदार्थ। अमर उजाला
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झांसी। बड़े खतरे हैं बसों में। खूब सुलग रहीं हैं बीड़ी-सिगरेट। इतना ही नहीं पेट्रोल और डीजल भी बसों से ढोया जा रहा है। न तो कोई रोकने वाला है और न ही टोकने वाला। चंद रुपये के लालच में बस वाले यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। कुछ खटारा बस तो ऐसी भी थीं जिनके इंजन से डीजल रिस रहा था। अगर कहीं से जरा सी चिंगारी आ जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है। हमने जब एक बस चालक को टैंक से रिसते डीजल को दिखाया तो उसका कहना था कि यह जब ओवरफ्लो हो जाता है तो ऐसा होता है। यह स्थिति किसी एक बस की नहीं थी बल्कि कई प्राइवेट बसों का यही हाल था।
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झांसी से रोडवेज की 127 और 500 प्राइवेट बसों का संचालन होता है। एक बड़ी संख्या ऐसी बसों की है जो सुरक्षा के मानकों पर कहीं टिक नहीं पा रही हैं। लेकिन फिर भी सड़कों पर दौड़ रही हैं। शनिवार को अमर उजाला की टीम जब बसों का हाल जानने निकली तो हर तरफ खतरा ही नजर आया। खासबात यह है कि सब कुछ जानकर भी जिम्मेदार खामोश हैं।
समय: दोपहर के 1 बजे। स्थान जेल चौराहा: यहां से एक प्राइवेट बस अशोक नगर के लिए जा रही थी। बस की खिड़की पर बैठे एक बुजुर्गवार बीड़ी पी रहे थे। उनके पीछे वाली सीट पर युवक ने सिगरेट सुलगा रखी थी। जब हमने बस में जाकर देखा तो जगह-जगह बीड़ी-सिगरेट के टुकड़े पड़े थे। जब परिचालक से कहा गया कि वह बस में सिगरेट पीने वालों को क्यों नहीं रोक रहे तो उसका कहना था कि सवारी हैं इन्हें कैसे मना कर सकते हैं।
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समय: दोपहर के 2 बजे। स्थान बस स्टैंड: यहां से एक छतरपुर जा रही थी। इस बस में भी खिड़की पर बैठे कई यात्री सिगरेट बीड़ी पी रहे थे। एक पैसेंजर तो चालक के पास वाली सीट पर बैठकर भी बीड़ी सुलगा रहा था। जब हमने कहा कि बस में इंजन के पास माचिस जलाना खतरा बन सकता है तो उसने कहा कि वह काफी फासले से बैठा है। इंजन के पास तक नहीं पहुंचेगी। बाद में जब चालक ने टोका तो उसने बीड़ी फेंक दी।
समय: दोपहर के 3 बजे। स्थान महानगर का बस स्टैंड: यहां से कोंच के लिए एक रोडवेज की बस जा रही थी। इस बस में तो आग बुझाने वाला जो छोटा सिलिंडर था वह भी खराब था। उसमें गैस ही नहीं थी। जब ड्राइवर से पूछा गया तो कोई जवाब नहीं दे पाया। परिचालक का कहना था कि वह इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को देंगे। लेकिन अब तक क्यों नहीं दी इस पर दोनों ने चुप्पी साध ली और परिचालक यात्रियों के टिकट बनाने लगा।
समय: दोपहर को 3-30 बजे। स्थान शिवपुरी बाईपास। यहां से शिवपुरी के लिए एक प्राइवेट बस जा रही थी। बस कम मालवाहक ज्यादा लग रही थी। बस पस ऊपर तक सामान लदा हुआ था। यात्री भी क्षमता से अधिक थे। बस की हालत भी जर्जर थी।
अग्निशमन यंत्र पड़ा था खराब
रोडवेज की कोंच जाने वाली बस में अग्निशमन यंत्र खराब पड़ा था। दोपहर 3:5 बजे के दौरान लिए जायजा में प्राथमिक चिकित्सा बाक्स में दवाएं नहीं थी। बस के फर्श की चददर भी उखड़ी पड़ी थी। नियमित जाने वाले कई यात्रियों ने बताया कि ऐसे में उनके पैर में कई बार चोट लगी है। बस में प्लास्टिक के छोटे बडे़ डिब्बे भी यात्री ले जाते नजर आए। कई यात्रियों ने कहा कि कोंच एट के लिए कई बसें नियमित नहीं जाती है। गांवों से होकर भी नहीं जाती है।
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ग्रामीण इलाकों के लिए रोडवेज की नियमित बसें नहीं मिलती है। ऐसे में महिला यात्रियों को जाने में दिक्कत होती है।
विनीता निवासी चिरगांव
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सरकारी बसों में सीट ठीक नहीं है, कांच भी जाम रहते है। बस की गैलरी में सामान भरे होने से काफी परेशानी होती है।
राजीव सोनी यात्री कोंच
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कोंच गरौठा के लिए बसें बहुत धीमी चलती है। ऐसे में समय से गांव देहात के यात्री समय से घर नहीं पहुंच पाते है।
शिवम सोनी यात्री उरई
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बसों में सफर करना समय की बर्बादी होती है। चिरगांव तक जाने में एक घंटे की जगह दो घंटे लग जाता है।
मंजिश यादव यात्री निवासी चिरगांव
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बसों में सफर करना बड़ा मुश्किल रहता है सामन ठसाठस भरे होने से भी परेशानी होती है। कई दिक्कत आती है।
रिंकू चौरसिया यात्री निवासी झांसी
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महिलाओं को बैठने की जगह कई बसों में नहीं मिलती है। ऐसे में केबिन में बैठकर आयी हूं। सफर मुश्किल भरा रहता है।
ज्योति यात्री निवासी झांसी
फुल नाइट चलने वाली आठ गाड़ियों में डबल ड्राइवर चलते है। सभी बसों में अग्निशमन यंत्र रखे गए है। यह जांच की जाएगी, कि पुराने अग्निशमन यंत्र क्यों है। सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं होगा।
तुलाराम वर्मा सेवा प्रबंधक
वर्जन
ट्रैवल एजेंसियों के संचालकों को समय-समय पर विभाग की ओर से नियमों के बारे में बताया जाता है। साथ ही फिटनेस के दौरान वाहन की पूरी जांच होने के बाद ही प्रमाण पत्र दिया जाता है। अगर ऐसे वाहन सड़क पर दौड़ रहे हैं, तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
मुखलाल चौरसिया, आरटीओ
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पिछले महीने करीब 50 चालान काटे गए हैं। ट्रैवल एजेंसियों की बसों पर सख्त नजर रहती है। जिले में कंडम बसों के संचालन के बारे में जानकारी करेंगे। अभियान चलाकर ऐसी बसों की सीज किया जाएगा।
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सत्येंद्र कुमार, एआरटीओ

बसों की छतों पर मानक से अधिक मात्रा में ढोया जारहा सामान ।

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