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सरकारी रक्तकोषों में निगेटिव ग्रुप का ब्लड खत्म, जान पर पड़ सकता भारी

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negitive blood is over in blood banks
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झांसी। जिला अस्पताल और महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंकों में एक भी निगेटिव ग्रुप का रक्त नहीं है। वैसे भी निगेटिव ब्लड ग्रुप का अनुपात काफी कम होता है। ऐसे में सरकारी ब्लड बैंकों में निगेटिव ग्रुप का रक्त पूरी तरह खाली हो चुका है। यह स्थिति खतरनाक है, क्योंकि रक्त की यह कमी किसी की भी जान पर भारी पड़ सकती है।
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मौजूदा समय में चाहें जिला अस्पताल हो या महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज दोनों ही चिकित्सालयों की ब्लड बैंकों में सिर्फ इमरजेंसी यूनिट का ब्लड ही बचा हुआ है। ऐसे में कई मरीजों को ब्लड बैंकों से मजबूरी में बिना ब्लड के लौटाना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या निगेटिव ग्रुप की कमी की वजह से खड़ी हो गई है। दोनों ही सरकारी ब्लड बैंकों में ए निगेटिव, बी निगेटिव, एबी निगेटिव और ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप का एक भी यूनिट रक्त नहीं है। ऐसे में अमर उजाला लोगों से अपील करता है कि अब जैसे आप घरों से बाहर निकलकर शॉपिंग कर रहे हैं, वैसे ही कुछ समय निकालकर सरकारी अस्पतालों की ब्लड बैंकों में जाकर रक्तदान भी करें। ताकि, खून की कमी से किसी भी व्यक्ति की मौत न हो पाए।
ये भी जानें
एक अनुमान के मुताबिक देश में हर रोज 38000 लोगों को रक्त की जरूरत पड़ती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अध्ययन बताता है कि भारत में हर साल 23.4 करोड़ बड़े ऑपरेशन होते हैं। 6.3 करोड़ ट्रामा से संबंधित ऑपरेशन हो रहे हैं। 3.1 करोड़ ऑपरेशन कैंसर के हो रहे हैं। इन सभी में खून की जरूरत होती है। डब्लूएचओ की मानें तो देश में हर साल एक करोड़ ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं, जिनमें प्रसव के दौरान मां को खून की जरूरत पड़ती है। ऐसी स्थिति में यदि तुरंत ब्लड न मिले तो मरीज की जान भी जा सकती है।
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ये हैं आंकड़े
ब्लड ग्रुप आबादी का प्रतिशत
ओ निगेटिव 1.43
ए निगेविट 0.57
बी निगेविट 1.79
एबी निगेविट 0.49
ओ पॉजिटिव 27.85
ए पॉजिटिव 20.80
बी पॉजिटिव 38.14
एबी पॉजिटिव 8.93
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