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निगेटिव रिपोर्ट वाले कैसे साबित करें कि कोरोना ही मौत का कारण

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झांसी। लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने वाले कई संक्रमितों की रिपोर्ट निगेटिव आ जाने के बाद मौत हुई। चूंकि, रिपोर्ट ने कोरोना मुक्त होने की पुष्टि की मगर मौत का कारण कोविड ही रहा। ऐसे में परिजनों के सामने बड़ी मुश्किल ये खड़ी हो गई है कि वो साबित कैसे करें कि उनके परिवार के सदस्य की मौत तो कोरोना से ही हुई है। भले ही रिपोर्ट निगेटिव आ गई हो। इसके अलावा कई ऐसे मरीज भी रहे, जिन्हें लक्षण तो कोरोना के रहे मगर पॉजिटिव नहीं आई। कुछ ही दिनों में उनकी मौत भी हो गई। ऐसे में ये लोग सरकार की तरफ से मिलने वाले मुआवजे से वंचित रह जाएंगे।
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झांसी में कोरोना का पहला मामला 27 अप्रैल 2020 को सामने आया था। तब से अब तक कोरोना संक्रमण से 639 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि, कई ऐसे मरीजों ने अस्पताल में भर्ती होने के दौरान दम तोड़ दिया, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी थी। इनकी मौत कोरोना के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं की गई। जबकि, इनकी मौत का कारण कोरोना ही था। कोरोना के चलते ही इसके फेफड़े समेत शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा और ठीक होने के बजाए उनकी सेहत बिगड़ती चली गई। आखिरकार जिंदगी और मौत के बीच कई हफ्तों तक संघर्ष करने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं, कई ऐसे भी मौतें झांसी में हुई, जिन्होंने कोरोना की जांच ही नहीं कराई। या कइयों ने जांच कराई मगर उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। जबकि, लक्षण पूरे कोरोना के ही थे। उन्हें कोरोना का खतरनाक स्ट्रेन लगा और कुछ ही दिनों में दम तोड़ दिया। अब सरकार ने कोरोना से मरने वालों के लिए मुआवजा देने का ऐलान किया है। शुक्रवार के आंकड़ों के अनुसार मुआवजे का लाभ सरकारी रिकॉर्ड में कोरोना से मरने वाले 639 मरीजों को ही मिलेगा।
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