संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। रेल मंत्रालय ने लोको पायलट और सहायक लोको पायलट के लिए आउट स्टेशन विश्राम के नियमों में बदलाव की घोषणा की है। इसके बाद से रनिंग स्टाफ और एनसीआरईएस के पदाधिकारियों ने इसका विरोध जताया। उन्होंने रनिंग ऑवर्स को घटाने के बजाय तकरीबन छह घंटे रखने पर अड़े हुए हैं।
अलग-अलग मंडल, डिवीजन में रनिंग स्टाफ को छह घंटे की ड्यूटी करने के बाद आठ घंटे का विश्राम दिया जाता है। इसी प्रकार, 5 घंटे वाले को 6 घंटे रेस्ट और 4 घंटे वाले को ढाई घंटे का रेस्ट दिया जाता है। इसमें छह घंटे की ड्यूटी पूरी करने पर पायलट और सहायक लोको पायलट को कोई दिक्कत नहीं आती है पर उससे कम घंटे की ड्यूटी करने वाले को कम रेस्ट प्रदान करने से एनसीआरईएस के पदाधिकारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि इससे लोको पायलट को आराम नहीं मिल पाएगा और ऐसे में यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य पर पहुंचाने में उनके ऊपर मानसिक दबाव रहेगा।
नॉर्थ सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज संघ इस तरह के आदेशों का समर्थन नहीं करती है। हाई पावर कमेटी की सिफारिशों के अनुसार रनिंग संवर्ग के कर्मचारियों को कुल 46 घंटे प्रति सप्ताह विश्राम दिया जाना प्रस्तावित हैं। अगर रनिंग संवर्ग का कर्मचारी पर्याप्त विश्राम नहीं करेगा तो उसका प्रतिकूल प्रभाव ट्रेन संचालन पर पड़ेगा। प्रशासन द्वारा इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त होना चाहिए। - गौरव श्रीवास्तव, मंडल अध्यक्ष, एनसीआरईएस झांसी मंडल
लोको पायलट के रेस्ट के साथ खिलवाड़ रेल सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। साथ ही पैसेंजर की जान मान के साथ खिलवाड़ हैं। एनसीआरईएस इसका पुरजोर विरोध करता हैं। - मो. जाहिद, सहायक सचिव, शाखा नंबर 6
शाखा नंबर 6 के सहायक सचिव राहुल कुमार अहिरवार, संगठन सचिव जाहर सिंह यादव और सचिव अनूप अग्रवाल ने कहा कि मुख्यालय के बाहर किसी भी हालत में छह घंटे से कम विश्राम होने पर लोको संचालन पर प्रभाव पड़ता है। न्यूनतम रेस्ट की अवधि कम से कम 6 घंटे होनी चाहिए। 5 घंटे से कम की ड्यूटी पर कुल ड्यूटी प्लस एक घंटे का रेस्ट दिया जाना रनिंग संवर्ग के लिए उचित नहीं हैं।