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नए स्ट्रेन में दोबारा संक्रमित होने के मामले बढ़े पर वैक्सीन बचा रही

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झांसी। कोरोना के नए स्ट्रेन की वजह से दोबारा संक्रमित होने के मामले तो बढ़े हैं मगर वैक्सीन लोगों की जान बचाने में कामयाब हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक नया स्ट्रेन ज्यादा खतरनाक है। छह से आठ महीने में एंटीबॉडी खत्म हो जाती है। इसलिए नए स्ट्रेन से ही लोगों के दोबारा संक्रमित होने की संभावना है। अगर तीसरी लहर से बचना है, तो अधिक आबादी को वैक्सीन लगवानी पड़ेगी।
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झांसी में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक, जिला अस्पताल के डॉक्टर और नर्स समेत कई ऐसे मामले हाल ही में सामने आए हैं, जिन्हें छह से आठ महीने के बाद दोबारा कोरोना संक्रमण हो गया। हालांकि, जिन्हें वैक्सीन लग चुकी थी, उन्हें मामूली लक्षण ही सामने आए। किसी को हल्की खांसी हुई तो किसी को जुकाम हुआ। किसी-किसी को मामूली बुखार भी आया, मगर एक भी ऐसा मामला सामने नहीं आया, जिसमें मरीज की स्थिति गंभीर हो गई हो। हालांकि, डॉक्टरों का मानना है कि कोरोना का नया स्ट्रेन ज्यादा आक्रामक है। इससे संक्रमित होने की दर पुराने स्ट्रेन की तुलना में 15 से 20 गुना ज्यादा है। ऐसे में आशंका है कि जो लोग दोबारा संक्रमित हुए हैं, उनमें से अधिकतर को नए स्ट्रेन ने ही अपनी चपेट में लिया होगा। डॉक्टरों का ये भी कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर दो सप्ताह में मंद पड़ सकती है मगर तीसरी लहर फिर से न आ जाए, इसलिए अधिक से अधिक आबादी को वैक्सीन लगवानी पड़ेगी। उनका मानना है कि जितनी अधिक मात्रा में वायरस का प्रसार होता है, उससे नए-नए स्ट्रेन बनने की संभावना रहती है।
केस-1
मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी छह महीने के अंदर ही दूसरी बार कोरोना संक्रमित हो गए। उन्हें दोनों वैक्सीन लग चुकी थी। हालांकि, उन्हें कोई बड़ी समस्या नहीं हुई और कुछ ही दिन में वह ठीक भी हो गए।
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केस-2
जिला अस्पताल की महिला कर्मचारी पांच महीने पहले कोरोना की चपेट में आ गई थी। कर्मचारी को वैक्सीन भी लग गई मगर कुछ समय पहले वो भी संक्रमण की चपेट में आ गई। हालांकि, चंद दिनों में ही स्वस्थ हो गई।
ये बोले विशेषज्ञ
इस बार कोरोना के नए स्ट्रेन से संक्रमण तेजी से फैल रहा है। संभावना है कि जिन्हें दोबारा कोरोना हो रहा है, वो भी नए स्ट्रेन की चपेट में आ रहे हों। हालांकि, वैक्सीन बहुत कारगर साबित हुई है। वैक्सीन के बाद जिन्हें कोरोना हुआ भी तो स्थिति गंभीर नहीं हुई। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन, जिला अस्पताल।
एंटीबॉडी लगभग छह महीने तक होती है। इसके बाद दोबारा संक्रमण होने की संभावना रहती है। अब तो नए-नए स्ट्रेन आ गए हैं। इसके लक्षण भी ज्यादा है। जो लोग दोबारा संक्रमित हो रहे हैं, उनमें ज्यादा संभावना नए स्ट्रेन से पॉजिटिव होने की है। - डॉ. पंकज सोनकिया, आइसोलेशन प्रभारी, मेडिकल कॉलेज।
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