दो माह पहले हत्या कर लाश गायब करने के आरोप में दर्ज कराए गए मुकदमे के बाद जिंदा पाई गई युवती ने बताया कि वह खुद ही परिवार के सदस्यों को बिना बताए दिल्ली चली गई थी। हत्या का मुकदमा ससुराल वालों पर दर्ज होने की जानकारी मिलने पर वह झांसी लौट आई। अब पुलिस उसके बयान दर्ज करके कोर्ट में हाजिर करने की तैयारी में है।
बांदा के काला कुआं निवासी रामसनेही की पुत्री रेखा सोनी ने वर्ष 2008 में अजय सोनी पुत्र लक्ष्मण दास सोनी निवासी बाजपेयी पुरा मऊरानीपुर से लव मैरिज की थी। तीन वर्ष तक वह ससुराल में अच्छी तरह से रही। फरवरी 2012 में उसने अपने भाई रामू सोनी को फोन कर परेशान होने की जानकारी दी। इसके बाद से रेखा का ससुरालियों से विवाद होने लगा। विवाद के चलते रेखा और अजय सोनी के बीच तलाक हो गया, मगर रेखा को मायके पक्ष ने स्वीकार नहीं किया, इस वजह से वह ससुराल में ही रहने लगी।
2015 में जून के प्रथम सप्ताह में वह ससुराल से गायब हो गई। नौ जून को ससुरालियों ने मायका पक्ष को रेखा के गायब होने की सूचना दी। परिवार के लोग मऊरानीपुर आए। इसके बाद रामसनेही के परिजनों ने एसएसपी को 30 जून 2015 को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि पति, उसके भाई विजय सोनी व सुनील सोनी और पिता लक्ष्मण दास सोनी ने रेखा को गायब करके हत्या कर दी और शव को ठिकाने लगा दिया। एसएसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई।
विगत दिवस इस मामले ने उस समय यू टर्न ले लिया जब रेखा ने नेट पर सर्फिंग करके मऊरानीपुर एसओ के सीयूजी नंबर का पता करके खुद को दिल्ली में जिंदा होने की जानकारी दी। यह जानकारी होने पर एसओ ने रेखा को झांसी बुलाया। रेखा दिल्ली से ट्रेन से झांसी आई। झांसी से पुलिस उसे थाने लाई।
रेखा ने पुलिस को बताया कि उसने दिल्ली में रहने वाली बांदा के एक सहेली से संपर्क किया था। उसने नौकरी दिलाने का वायदा किया। इसके बाद वह दोपहर में घर से निकली और रात करीब नौ-10 बजे झांसी स्टेशन से ट्रेन पकड़कर दिल्ली मेजर चौक पहुंच गई। वहां उसने सहेली के साथ एक फैक्टरी में नौकरी कर ली। विगत दिवस उसे पता चला कि परिजनों ने ससुरालियों पर उसकी हत्या करके शव को ठिकाने लगाने का मुकदमा दर्ज कराया है। इस पर उसने थानाध्यक्ष को फोन करके हकीकत बताई।
शुरूआत में ही हकीकत आ सकती थी सामने
रेखा प्रकरण ने थाना मऊरानीपुर पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यदि पुलिस मुकदमा दर्ज करने से पहले उससे मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकालकर पड़ताल करती तो सभी हकीकत सामने आ जाती, मगर पुलिस ने ऐसा नहीं किया।