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वैज्ञानिक पद्धति से होनी चाहिए प्राकृतिक खेती : डॉ. पंजाब

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन कुलाधिपति डॉ. पंजाब सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से प्राकृतिक खेती करनी चाहिए। सीमित संसाधनों के उचित उपयोग, कौशल एवं दक्षता द्वारा किसानों के लिए उपयुक्त तकनीकों का विकास जरूरी है। किसानों को केंद्र में रखते हुए कृषि नीतियों का निर्धारण किया जाना है।

मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के फसल विज्ञान उपमहानिदेशक डॉ. टीआर शर्मा ने खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए रोग प्रबंधन की महत्ता और पौध सुरक्षा विज्ञान के चरणबद्ध विकास के बारे में जानकारी दी। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि शोध से निकले निष्कर्ष किसानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कृषि वैज्ञानिकों की है। डॉ. पीके चक्रवर्ती ने कहा कि वर्तमान समय में हमें रासायनिक विधियों के अलावा प्राकृतिक और वैज्ञानिक विधियों के उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए।
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वहीं, शनिवार को कार्यशाला का समापन हो गया। इन दो दिनों में छह तकनीकी सत्रों में देश भर से आए वैज्ञानिकों ने अरहर में झुलसा रोग एवं मौसम के प्रभाव पर, पौधों की बीमारियों के प्रबंधन के लिए माइक्रोबियल कीटनाशकों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं आदि पर अपने-अपने सुझाव दिए।
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कार्यशाला में शशांक पटेल और रोहिनी को एमजे नरसिम्हन शैक्षणिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. राजेश कुमार पांडेय, डॉ. मीनाक्षी आर्य, डॉ. पंकज कौशल, डॉ. एसके चतुर्वेदी, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. आरके सिंह, डॉ. मनीष श्रीवास्तव, डॉ. वीपी सिंह, डॉ. एमजे डोबरियाल आदि मौजूद रहे।
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