अब नहीं दिखेंगे नगरा हाट के ‘ठाठ’
झांसी। नगरा में रेलवे की जमीन पर 90 वर्ष से हर रविवार को लगने वाली हाट अब इतिहास बन गई है। इसका तहबाजारी का ठेका 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। रेलवे ने यह जमीन कोच फैक्ट्री बनाने के लिए दे दी है। इसलिए अब ठेका भी आगे नहीं बढ़ाया गया। रेलवे प्रशासन ने भी रविवार को यहां पर दुकान लगाने वालों को अल्टीमेटम दे दिया है। इसकी जानकारी होते ही दुकानदारों के अलावा खरीदार भी मायूस हो गए। अब दुकानदारों को नई जगह तलाशनी होगी।
शहर में छावनी के बाद सबसे ज्यादा जमीन रेलवे के पास है। यहां पर रेलवे के कई कारखाने भी हैं। उनमें हजारों रेलवे कर्मचारी काम करते हैं। नगरा क्षेत्र में रेलवे कर्मचारियों के क्वार्टर भी बने हैं। पहले रेलवे के वर्कशॉप के मुख्य गेट के सामने ही लोग दुकान लगाकर सब्जी व अन्य सामान बेचते थे। बाद में रेलवे ने मैदान में हाट लगाने के लिए मंजूरी दे दी। 90 साल पहले इसके लिए तहबाजारी का ठेका उठा था। हर साल उसके लिए बोली लगाई जाती थी। इससे रेलवे को अच्छा खासा राजस्व भी मिलता था।
नगरा हाट में एक हजार से अधिक अस्थायी दुकानें लगाई जातीं। शाम को हाट खत्म होते ही उनको हटा दिया जाता। इस बाजार में दैनिक उपयोग ही हर चीज मिलती थी। यहां पर साग-सब्जी, राशन से लेकर मीट, मछली और मुर्गा भी मिलता था, इसलिए रविवार को हाट में खरीदारों की काफी भीड़ लगती रही। यहां पर शहर के अलावा सफा चमरऊआ, कोटी चमरऊआ, मुरारी, बिजौली, मथुरापुरा, पठाई, दुर्गापुर, बल्लमपुर, राजगढ़, हंसारी, आजादपुरा, ओरछा, डेली, बैदोरा, प्रेमनगर, सैयद नगर, ताज कंपाउंड आदि क्षेत्रों के लोग खरीदारी करने आते।
केंद्र सरकार ने झांसी में रेलवे की कोच फैक्ट्री बनाने का फैसला किया था। उसके लिए रेलवे ने इस जमीन को उपयुक्त समझा। मंजूरी मिलने के बाद उसे खाली कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई। 24 जुलाई को तहबाजारी का अंतिम दिन है। अब आगे रेलवे ने तहबाजारी का ठेका नहीं दिया है। रविवार को यहां पर खरीदारी के लिए आखिरी दिन था। रेलवे द्वारा मैदान खाली कराने से दुकानदार काफी मायूस हैं। उनका कहना है कि कई पीढ़ी से वह लोग यहां पर दुकान लगाकर अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं। अब उनसे सामने समस्या खड़ी हो गई है।
रेलवे ने मैदान में हाट लगाने के लिए तहबाजारी का ठेका दिया था। ठेका 24 जुलाई को खत्म होगा। इस जमीन पर रेल कोच फैक्ट्री का निर्माण कराया जाएगा। इसलिए ठेका अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। यहां पर अब हाट भी नहीं लगेगी।
मनोज कुमार सिंह, जन संपर्क अधिकारी, रेलवे