महानगर की सबसे बड़ी समस्या कचरा कलेक्शन को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम 25 करोड़ रुपये खर्च करेगा। एक साल से अटकी प्रक्रिया को नगर निगम ने रफ्तार दे दी है। नई टेंडर प्रक्रिया में नगर निगम ने कई बदलाव किए हैं। इस बार नए अनुबंध में दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है। महानगर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम लंबे समय से कवायद कर रहा है।
पांच साल पहले पांच कंपनियों से कूड़ा कलेक्शन का अनुबंध किया गया था, जो मार्च 2019 में खत्म हो गया। करीब डेढ़ साल से कचरा उठान व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। नगर निगम ने शासन स्तर से बात करने के बाद नई प्रक्रिया शुरू की है। प्रयागराज नगर निगम की तर्ज पर नगर निगम झांसी ने स्मार्ट सिटी के तहत कूड़ा कलेक्शन को लेकर देशभर की कंपनियों से आवेदन मांगे हैं।
नई कंपनी को कचरा कलेक्शन के साथ कचरे का निस्तारण भी करना होगा। पहले कंपनी से नगर निगम पांच साल के लिए अनुबंध करेगा। अगर वह ठीक काम करेगी तो इसे दो साल के लिए बढ़ाया जाएगा। वहीं, नगर निगम ही कंपनी को कचरा कलेक्शन के लिए वाहन मुहैया कराएगा। नगर निगम इस पर 25 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसके लिए कंपनियों से 21 जनवरी तक आवेदन मांगे हैं।
कंपनियों की पात्रता में किए गए बदलाव
नगर निगम ने कंपनी की पात्रता शर्तो में बदलाव किए हैं। इसमें कहा गया है कि वह कंपनी ही आवेदन कर सकेगी, जिसने 180 से 250 टन प्रतिदिन कूड़ा कलेक्शन के साथ निस्तारण करने के क्षेत्र में काम किया हो। कंपनी को यह भी प्रमाण देना होगा कि उसने तीन लाख से पांच लाख आबादी वाले क्षेत्र में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम किया है।
हर घर और कूड़ेदान पर लगेगा आरएफआईडी टैग
कूड़ा कलेक्शन की निगरानी के लिए नगर निगम आरएफआईडी टैग (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग) का इस्तेमाल करेगा। यह टैग हर घर और सार्वजनिक स्थानों के कूड़ेदान पर लगेगा। अगर किसी घर या कूड़ेदान से कूड़ा नहीं लिया जाएगा, तो इसकी सूचना सीधे कमांड कंट्रोल सेंटर को मिल जाएगी।
कचरा कलेक्शन और निस्तारण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 21 जनवरी तक राष्ट्रीय स्तर की कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं। स्मार्ट सिटी के तहत पहले यह प्रक्रिया 13 वार्डों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे 60 वार्डों के लिए लागू किया गया है।
- शादाब असलम, अपर नगर आयुक्त