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कचरा उठान में भ्रष्टाचार पर भड़के पार्षद, अफसर रहे गायब

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : demo
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नगर निगम में बृहस्पतिवार को दूसरे दिन हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक  में बजट पर मुहर नहीं लग सकी। कचरा उठान, टेंडरिंग और मार्ग प्रकाश  व्यवस्था को लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए। साथ ही जवाबदेह अधिकारियों की  गैरहाजिरी पर जमकर आक्रोश व्यक्त किया। अब शुक्रवार को फिर से बजट को लेकर चर्चा होगी। नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में बुधवार को सवालों का जवाब न  मिलने पर बैठक टाल दी गई थी। दूसरे दिन भी बैठक करीब पौन घंटे की देरी से  शुरू हुई। करीब चार बजे महापौर रामतीर्थ सिंघल और नगर आयुक्त मनोज कुमार  सिंह पहुंचे। महापौर ने बैठक की कार्रवाई शुरू करने के लिए कहा, तो  पार्षदों ने स्वास्थ्य विभाग, कर्मशाला और मार्ग प्रकाश विभाग के जिम्मेदार  अधिकारियों की गैरहाजिरी पर जवाब मांगा और हंगामा शुरू कर दिया। देर शाम तक  सवालों के जवाब न मिलने और अधिकारियों के न आने पर बैठक का बहिष्कार कर  दिया। अब शुक्रवार को फिर से बजट पर चर्चा होगी। नगर आयुक्त ने बैठक से  गायब रहने पर एई प्रकाश विभाग का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं। पार्षदों  ने बैठक  के दौरान अधिकारियों को भोजन प्रबंध में हुआ 1140 रुपये व्यय  सौंपा। पार्षदों ने कहा कि नगर निगम एक बैठक का खर्च 1.15 लाख रुपये दिखाता  है। इस मौके पर पार्षद विकास खत्री, विमल किशोर, अरविंद कुमार, इंदु वर्मा,  किशोरी रायकवार, बंटी सोनी, प्रदीप नगरिया, एसीएम वान्या सिंह, अपर नगर  आयुक्त अरुण गुप्त समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे। पार्षद महेश गौतम ने महानगर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में लगी  कंपनियों पर हो रहे खर्च और अनुबंध विवरण मांगा। इस पर सामने आया कि महानगर  में कूड़ा कलेक्शन को लगी छह कंपनियों में से पांच कंपनियों के अनुबंध  मार्च 2019 में खत्म हो गए हैं। नगर आयुक्त ने कहा कि उन्होंने नए टेंडर न  होने तक 20 फीसद कटौती के साथ अनुबंध बढ़ा दिया है। पार्षदों ने कहा कि सदन  में प्रस्ताव रखे बिना अनुबंध कैसे बढ़ाया गया? उन्होंने नगर आयुक्त के  खिलाफ शासन को पत्र लिखने की मांग की।
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