फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संग्रहालय में घुट रही बुंदेलखंड की विरासत

Wed, 17 Apr 2019 01:03 AM IST
देवेंद्र कुमार अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
musiyam in jhansi news - फोटो : amar ujala, jhansi news
विज्ञापन
बुंदेलखंड के जिस शौर्य, पराक्रम और संस्कृति का डंका देश-विदेश में बजता है उसकी विरासत झांसी में ही देखने को नहीं मिलती। अफसोस, तमाम दुर्लभ मूर्तियां व अन्य सामग्री रानी लक्ष्मीबाई के ऐतिहासिक किले की तलहटी में स्थित राजकीय संग्रहालय के तालों में बंद है। जिन वीथिकाओं को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं उन सैलानियों के हाथ निराशा लगती है। संग्रहालय में 14 वीथिकाएं हैं, लेकिन इनमें से दर्शकों के लिए सिर्फ छह ही खुली हुई हैं।
विज्ञापन


कई वीथिकाएं तो ऐसी हैं, जो उद्घाटन के बाद एक दिन भी नहीं खुली रह सकीं। जिम्मेदार स्टाफ कम होने का रोना रोते रहते हैं।

सन 1978 में राजकीय संग्रहालय की स्थापना की गई थी। उद्देश्य था देश - विदेश के सैलानियों को वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई और बुंदेलखंड की प्राचीन मूर्तिकला, राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में बुंदेलों के योगदान और लोक कला संस्कृति से परिचय कराना। अधिकारियों की मानें तो प्रारंभ में तीन वीथिकाओं के लिए 24 कर्मचारी तैनात किए गए थे। लेकिन अब जब संग्रहालय में 14 वीथिकाएं है, तब इनके लिए सिर्फ एक वीथिका सहायक, तीन वीथिका परिचर रह गए हैं।

ऐसे में सैलानियों को सिर्फ छह वीथिकाएं ही देखने को मिल रही हैं। जबकि एक वीथिका में एक वीथिका सहायक व एक परिचर तैनात होता है। बजट क ी कमी से भी कैमरों का रख रखाव तथा अन्य कार्य नहीं हो पा रहा है। स्टाफ की भारी कमी की वजह से संग्रहालय का संचालन मुश्किल होता जा रहा है।
विज्ञापन


यह वीथिकाएं हैं बंद
राजकीय संग्रहालय में बंद पड़ी वीथिकाओं में सिक्का वीथिका, टेराकोटा गैलरी, प्राकृतिक चिकित्सा गैलरी, डॉ. वृंदावन लाल वर्मा गैलरी, बुंदेली लोक नृत्य कला गैलरी, स्वतंत्रता संग्राम गैलरी, डाक टिकट संग्रह गैलरी, 1857 की क्रांति को दर्शाने वाली झांकियों की वीथिकाएं है। इसके अलावा पुस्तकालय भी बंद पड़ा है। इसमें अनमोल पांडुलिपियां और पुस्तकें है।

पांच रुपये में यह देखते है वीथिकाएं
सैलानियों को संग्रहालय में आओ मनु के साथ खेलें, जैन गैलरी, शिव गैलरी, वैष्णव गैलरी, रानी के जीवन को दर्शाने वाली वीथिकाएं दिखाई जाती हैं। भारतीय नागरिकों से संग्रहालय को देखने के लिए टिकट दर पांच रुपया है, तो विदेशी नागरिकों से टिकट का शुल्क 25 रुपये लिया जाता है।

सिर्फ एक घंटे के लिए खुली थी यह वीथिका
राजकीय संग्रहालय में सैलानी आकर्षित हाें, इसके लिए वर्ष 2016 में 1857 की क्रांति के दृश्यों को दिखाने वाली वीथिका संग्रहालय के सभागार में बनाई गई थी। यह वीथिका 31 दिसंबर को सिर्फ एक घंटे के लिए ही खोली गई थी। तब इसका शुभारंभ हुआ था। इसके बाद से यह अब तक ताले में बंद है। इसी प्रकार का हाल क्विज उपकरण का था। इसमें एक रुपये का सिक्का डाला जाता था। लेकिन यह मशीन अब कहां है, किस हाल में है पता नहीं।


अद्भूत संग्रह है संग्रहालय में
संग्रहालय में लगभग 17,000 अद्भूत प्राचीन मूर्तियों, पांडुलिपियों, अस्त्र शस्त्रों, पेटिंग, शिलालेख, सिक्के आदि का विशाल संग्रह है। मूर्तियों में छठवीं शताब्दी से लेकर 16 - 17 वीं शताब्दी तक की हैं। जो बुंदेलखंड के ललितपुर तथा अन्य जिलों में पाई गई थीं। हालांकि रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ा कोई स्मृति चिह्न अथवा अवशेष संग्रहालय में नहीं है।

राजकीय संग्रहालय को पूरी तरह से खोलना चाहिए। क्योंकि प्रत्येक सैलानी की इच्छा होती है, कि वह एक जगह पर समूची लोक कला संस्कृति को देख सके।
रजनी अग्रवाल, सैलानी निवासी जबलपुर

सैलानी को पता चल सके कि संग्रहालय में क्या - क्या है। शासन को चाहिए कि वह बुंदेलखंड के इस महत्वपूर्ण संग्रहालय को विकसित करे।
फरहान सैलानी निवासी झांसी  


कर्मचारियों की कमी की समस्या जस की तस है। निदेशालय से मांग की गई है कि वह कर्मचारियों को पर्याप्त संख्या में तैनात करे। ताकि बंद पड़ी गैलरियां खुल जाएं।
विज्ञापन

डॉ. आशा पांडेय उप निदेशक राजकीय संग्रहालय
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें